देश की समस्त भाषाओं को समर्पित भारत की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति द्वारा उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित लेखक गाँव में आयोजित तीन दिवसीय 23वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन ‘देहरादून साहित्य महोत्सव’ के रूप में अत्यंत भव्य, गरिमामय एवं ऐतिहासिक ढंग से संपन्न हुआ। इससे पूर्व संस्था देश के 22 विभिन्न राज्यों में सफल राष्ट्रीय अधिवेशनों का आयोजन कर चुकी है।
उद्घाटन सत्र: संस्कृति और साहित्य का सारस्वत उत्सव
उद्घाटन सत्र के अंतर्गत अखिल भारतीय सर्वभाषा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने इस आयोजन को संस्कृति और साहित्य का अप्रतिम पर्व बताते हुए समिति के ग्लोबल अध्यक्ष पंडित सुरेश नीरव की अनवरत साहित्य-साधना को विस्तार से रेखांकित किया।
उन्होंने कहा— “शब्द अमृत का अंश है, और उससे जुड़कर ही मनुष्य अमरत्व को प्राप्त करता है।”
इस अवसर पर संस्कृति राज्य मंत्री (उत्तराखंड सरकार) मधु भट्ट ने भाषाओं को देश को जोड़ने का सशक्त माध्यम बताते हुए समिति के प्रयासों की सराहना की।
इटावा (उ.प्र.) से पधारे वरिष्ठ पत्रकार अतुल वी.एन. चतुर्वेदी ने सभी प्रबुद्ध अतिथियों एवं साहित्यकारों का स्वागत किया। सर्वभाषा कवि सम्मेलन: भाषाई विविधता में एकता
कवि सम्मेलन में देश की अनेक भाषाओं में कविता पाठ हुआ।
पंडित सुरेश नीरव ने संस्कृत में देश-समर्पित कविता प्रस्तुत की, वहीं सुभाष चंद सैनी ने देहरादून की वंदना की। अन्य प्रमुख रचनाकारों में—
डॉ. सविता चड्ढा (पंजाबी), डॉ. प्रवीण शर्मा (अंग्रेज़ी), विनय कुमार (उर्दू), सुमन सैनी (गढ़वाली), राकेश जुगराण (गढ़वाली/व्यंग्य), आचार्य विजय तिवारी ‘किसलय’ (बुंदेली), मधु मिश्रा (ब्रज), मोहिनी पांडेय (अवधी), डॉ. राधा बिष्ट (सर्वभाषा गीत), डॉ. राखी सिंह कटियार (गुजराती), संतोष नेमा ‘संतोष’ (बुंदेली), अनीता प्रसाद (मैथिली), रंजना मजूमदार (बांग्ला) एवं कन्हैयालाल ‘भ्रमर’ (राजस्थानी) शामिल रहे। पंडित सुरेश नीरव ने संचालन करते हुए प्रत्येक कवि को उसकी मातृभाषा में आमंत्रित कर एक नई साहित्यिक परंपरा का सूत्रपात किया।

दूसरा दिन: हिंदी कवि सम्मेलन
का शुभारंभ विमल बहुगुणा ने ढपली के साथ देवभूमि वंदना से किया।
कवि सम्मेलन में श्री ज्ञानचंद मर्मज्ञ, विनोद भृंग, सुरेंद्र कुमार सैनी, नवीन शरण निश्चल, डॉ. रश्मि कुलश्रेष्ठ, सरोजिनी चौधरी, रेणु रतन मिश्रा, ब्रह्मदेव शर्मा, डॉ. अमरकांत कुमार, डॉ. मंजु गुप्ता, डॉ. दयावती शर्मा, डॉ. शंकर सहर्ष, विनीता चतुर्वेदी, यशपाल सिंह ‘यश’, डॉ. प्रकाश उपाध्याय, वीणा अग्रवाल, स्मृति श्रीवास्तव, उमंग सरीन, प्रकाश गुप्ता, मदन साहनी एवं मधु मिश्रा ने सशक्त काव्य पाठ किया। संचालन डॉ. राखी कटियार ने किया।
तीसरा दिन: अटल स्मृति व्याख्यान माला हिमालय फाउंडेशन के तत्वावधान में नवनिर्मित प्रेक्षागृह में अटल स्मृति व्याख्यान माला (द्वितीय संस्करण) का आयोजन हुआ।कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरुमीत सिंह ने किया। संचालन डॉ. विदुषी पोखरियाल ने किया।
द्वितीय सत्र का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. पुष्कर सिंह धामी ने किया, जबकि विशिष्ट अतिथि डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ रहे। इस अवसर पर पत्रकार प्रदीप सरदाना, पंडित सुरेश नीरव एवं समाजसेवी प्रेम बरकोटिया ने भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
समापन सत्र: सांस्कृतिक विविधता का उत्सव समापन सत्र में गीत, लोकगीत, कविता एवं नृत्य पर केंद्रित ‘विविधा’ सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि डॉ. विदुषी पोखरियाल ने स्पर्श हिमालय फाउंडेशन की ओर से प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए।कार्यक्रम के आरंभ में वरिष्ठ कवि डॉ. बेचैन कंडयाल ने कविता पाठ किया।यशपाल सिंह ‘यश’ द्वारा लिखित काव्य-नाटिका ‘इतिहास बोध’ का मंचन भी विशेष आकर्षण रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंडित सुरेश नीरव ने की तथा आभार मधु मिश्रा ने व्यक्त किया। इस अवसर पर संस्था द्वारा प्रतिभागियों को वार्षिक अलंकरणों से भी सम्मानित किया गया। तीनों दिनों के कार्यक्रमों का लाइव प्रसारण किया गया, जिसे देश-विदेश में सराहना मिली।