नीति निर्माताओं, शिक्षा विशेषज्ञों और उद्योग जगत ने युवाओं के भविष्य के लिए साझा की रणनीतियाँ
‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को साकार करने के लिए शिक्षा, कौशल विकास और सतत आजीविका को सरकार द्वारा प्रमुख राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में प्रयास जुवेनाइल एड सेंटर (सोसाइटी) ने इंडिया हैबिटेट सेंटर के सहयोग से “कौशल, शिक्षा और आजीविका: विकसित भारत में सीएसओज की भूमिका” विषय पर एक महत्वपूर्ण विचार–विमर्श गोष्ठी का आयोजन किया।
इस चर्चा में नीति निर्माता, शिक्षा विशेषज्ञ, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, सीएसआर पेशेवर और नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्र हुए। गोष्ठी का उद्देश्य शिक्षा–कौशल–आजीविका के आपसी संबंधों को सुदृढ़ करना तथा भारतीय युवाओं के लिए समावेशी, भविष्य-उन्मुख और टिकाऊ अवसरों के निर्माण पर ठोस रणनीतियों पर मंथन करना रहा।
प्रयास जेएसी सोसाइटी के संस्थापक एवं मार्गदर्शक, पूर्व आईपीएस अधिकारी अमोद कंठ ने भारत की विकास यात्रा में नागरिक समाज संगठनों की अनिवार्य भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सीएसओ नीति और जमीनी हकीकत के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करते हैं। उनकी जमीनी पकड़, नवाचार क्षमता और समुदाय का विश्वास शिक्षा, कौशल विकास और आजीविका योजनाओं की प्रभावी अंतिम मील तक पहुंच सुनिश्चित करता है।
इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. (डॉ.) के. जी. सुरेश ने कौशल विकास में कार्यसंस्कृति, नैतिकता और प्रतिभा की पहचान पर विशेष जोर दिया। उन्होंने मनोमितीय आकलन, प्रतिभा मैपिंग और समुदाय-आधारित मॉडलों को अपनाने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की अंतर्निहित क्षमता को पहचानना समय की मांग है।
गोष्ठी में एनएसडीसी के पूर्व प्रबंध निदेशक दिलीप चेनाय, आर. पी. सिंह, संयुक्त सचिव (कौशल शिक्षा), सीबीएसई, अमर झा, झारखंड स्किल डेवलपमेंट मिशन के पूर्व सीईओ, अमल सिन्हा, बीएसईएस के ग्रुप सीईओ, प्रो. अशोक कुमार गाबा, कार्यकारी सदस्य, एनसीवीईटी, उमंग लाल, शिक्षाविद् विनिता अग्रवाल, एनसीवीईटी की पूर्व कार्यकारी सदस्य, नवीन वर्मा, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एवं प्रयास गवर्निंग बोर्ड सदस्य, अमिताभ श्रीवास्तव, प्रयास के जीबी सदस्य, डा. अमृता सिंह, प्रधानाचार्य, बिड़ला विद्या निकेतन स्कूल, डा. सुमन धवन, कैंपस निदेशक, दिल्ली स्किल यूनिवर्सिटी, मनीषा वाधवा, विश्व युवा केंद्र, आर. एस. फाउंडेशन, दिल्ली सरकार, विश्वविद्यालयों, स्कूलों और उद्योग निकायों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता की।
गोष्ठी में इस बात पर व्यापक सहमति बनी कि सरकार, उद्योग और नागरिक समाज के बीच समन्वय से ही ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है, जिसमें शिक्षा, कौशल और सतत आजीविका की केंद्रीय भूमिका होगी।