देश की राजधानी दिल्ली में रविवार को प्रवासी उत्तराखण्डियों ने जंतर-मंतर पर जोरदार धरना-प्रदर्शन कर अंकिता भंडारी हत्याकांड में संलिप्त अपराधियों को बचाने का आरोप लगाते हुए उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के तत्काल इस्तीफे की मांग की।
धरने में शामिल विभिन्न प्रवासी संगठनों ने एक स्वर में कहा कि अंकिता हत्याकांड की निष्पक्ष जांच तभी संभव है जब इसकी जांच सीबीआई से कराई जाए, वह भी सर्वोच्च न्यायालय के किसी सिटिंग जज की निगरानी में। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास कर रही है।
जंतर-मंतर पर आयोजित इस धरने में बड़ी संख्या में उत्तराखण्ड के प्रवासियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। धरने के उपरांत भू-कानून संयुक्त संघर्ष समिति के एक शिष्टमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ज्ञापन सौंपकर सीबीआई जांच की मांग की।

इस अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता धीरेन्द्र प्रताप ने केंद्र और राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दस दिनों के भीतर दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो पूरा उत्तराखण्ड दिल्ली की सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि अंकिता हत्याकांड को लेकर जनआंदोलनों को और व्यापक तथा मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सभी विपक्षी दल एकजुट हैं और सीबीआई जांच की मांग पर कोई समझौता नहीं होगा।
जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्र ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मौजूदा सरकार की मानसिकता महिलाओं के प्रति नफरत और असंवेदनशीलता से भरी हुई है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल अंकिता की नहीं, बल्कि हर बेटी की सुरक्षा और सम्मान की लड़ाई है, जिसे मिलकर लड़ना होगा।

प्रसिद्ध समाजसेवी और बलात्कार-विरोधी कार्यकर्ता योगिता भयाना ने कहा कि वे बेटियों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ अपनी लड़ाई लगातार जारी रखेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखण्ड सरकार इस अपराध में केवल मौन नहीं, बल्कि लिप्त है। भयाना ने कहा कि यदि असली अपराधी और वीआईपी का नाम पूरी तरह सामने आ गया, तो केंद्र और राज्य—दोनों सरकारें गिर जाएंगी।
समाजसेवी और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरिपाल रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री की भूमिका परोक्ष नहीं बल्कि प्रत्यक्ष रही है। राज्य के मुखिया होने के नाते वे जवाबदेह हैं और उन्हें यह बताना चाहिए कि अब तक उन्होंने अंकिता को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए हैं।

रावत ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री वीआईपी समेत सभी अपराधियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं, इसलिए उन्हें तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि सीबीआई जांच हो, लेकिन वह सर्वोच्च न्यायालय के किसी सिटिंग जज की देखरेख में ही होनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि दुष्यंत गौतम को तत्काल गिरफ्तार कर उसके खिलाफ संगीन आपराधिक धाराओं में मुकदमा चलाया जाए। रावत ने सवाल उठाया कि जब वीआईपी का नाम उजागर हो चुका है, तो सरकार गवाहों से सबूत लाने की बात क्यों कर रही है। उन्होंने कहा कि कानून के तहत जांच एजेंसियों का काम सरकार और पुलिस का होता है, न कि आम नागरिकों का।
धरने के अंत में प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी कि जब तक अंकिता को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और इसे और व्यापक रूप दिया जाएगा।