सैनी एन्क्लेव पार्क में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन सनातन संस्कृति, राष्ट्रचेतना, सामाजिक समरसता और हिंदू एकता का एक विराट प्रतीक बनकर उभरा। यह आयोजन न केवल एक सम्मेलन था, बल्कि हिंदू समाज की चेतना, संस्कार और संगठन शक्ति का जीवंत प्रदर्शन भी रहा। क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं, समाजसेवियों, प्रबुद्धजनों, युवाओं एवं मातृशक्ति की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया।

सम्मेलन स्थल पर देशभक्ति के उद्घोष, सनातन मूल्यों की गूंज और सांस्कृतिक चेतना से ओत-प्रोत वातावरण ने उपस्थित जनसमूह में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार किया। आयोजन का मूल उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश देना तथा राष्ट्रहित में एकजुट प्रयासों का आह्वान करना रहा। इस भव्य आयोजन की शोभा बढ़ाने हेतु कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम की दिव्य एवं ओजस्वी उपस्थिति ने सम्मेलन को आध्यात्मिक ऊँचाइयों तक पहुँचाया।

उनके प्रेरक विचारों ने धर्म, राष्ट्र और समाज के प्रति कर्तव्यबोध को और अधिक सुदृढ़ किया। प्रख्यात विचारक एवं शिक्षाविद प्रोफेसर बलदेव भाई शर्मा ने अपने विचारोत्तेजक संबोधन में भारतीय संस्कृति, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में सनातन परंपराओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

वरिष्ठ समाजसेवी एवं जनप्रिय व्यक्तित्व जयनारायण अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति और उनके मार्गदर्शक विचारों ने सामाजिक एकता, सेवा भाव और संगठन की शक्ति को और अधिक मजबूती प्रदान की। इस विराट आयोजन को सफल स्वरूप देने में आयोजक कोर टीम की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। विशेष रूप से मुख्य आयोजक सुशील तिवारी के कुशल नेतृत्व, दूरदृष्टि और अथक प्रयासों से यह सम्मेलन सुव्यवस्थित, अनुशासित और अत्यंत प्रभावशाली रूप में संपन्न हुआ। उनकी संगठन क्षमता और समर्पण ने आयोजन को नई पहचान दी।
सम्मेलन के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने एक स्वर में हिंदू समाज की एकता, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य हेतु संगठित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, ओजस्वी उद्बोधन और जनभागीदारी ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया। इस विराट हिंदू सम्मेलन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी सम्मानित अतिथियों, आयोजक सुशील तिवारी, आयोजक कोर टीम, स्वयंसेवकों एवं विशाल जनसमूह का हृदय से आभार एवं कृतज्ञता।