देश की प्रतिष्ठित लेखिका एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ. दर्शनी प्रिय द्वारा लिखित पुस्तक “प्रधानमंत्री मोदी के अनमोल रत्न” का भव्य लोकार्पण समारोह नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के डिप्टी चेयरमैन हॉल में आयोजित किया गया। इस अवसर पर राज्यसभा के माननीय उपसभापति श्री हरिवंश ने मुख्य अतिथि के रूप में पुस्तक का लोकार्पण किया।
यह पुस्तक 35 विशिष्ट पद्म श्री पुरस्कार विजेताओं के जीवन और उनके असाधारण योगदान को समर्पित है, जिनकी प्रेरक यात्राएँ “नए भारत” की आत्मा, संवेदना और सामाजिक चेतना को सजीव रूप में प्रस्तुत करती हैं। पुस्तक न केवल वर्तमान पीढ़ी को प्रेरित करती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान विरासत भी है।

डॉ. दर्शनी प्रिय ने गहन शोध और संवेदनशील लेखन के माध्यम से उन असल जननायकों को प्रकाश में लाने का सराहनीय प्रयास किया है, जो प्रायः समाज की अंधेरी गलियों में गुमनाम रह जाते हैं। एक लेखिका के रूप में उनकी मेहनत, दृष्टि और सामाजिक सरोकार इस कृति में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होते हैं। कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री सैयद शाहबाज हुसैन तथा राज्यसभा सांसद श्रीमती सुशीला गुप्ता की विशिष्ट उपस्थिति रही। सभी अतिथियों ने पद्म पुरस्कार प्रणाली में आए सकारात्मक और परिवर्तनकारी बदलावों पर प्रकाश डाला, जिसमें अब विशेषाधिकार की बजाय योग्यता, सेवा और जमीनीप्रभाव को प्राथमिकता दी जा रही है—जिसे “पीपल्स पद्म” की संज्ञा दी जा रही है।
इस अवसर पर कई पद्म श्री पुरस्कार विजेता भी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देकर देश को गौरवान्वित किया है कला जगत की प्रतिष्ठित हस्ती पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव भी समारोह में मौजूद रहीं, जो भारतीय लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हेतु अपने समर्पण के लिए जानी जाती हैं।

पद्म श्री पुरस्कारों का महत्व
पद्म श्री भारत गणराज्य का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जिसकी स्थापना 1954 में हुई थी। यह पुरस्कार कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा और सार्वजनिक जीवन सहित विविध क्षेत्रों में विशिष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है।
वर्तमान शासनकाल में इसकी चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं—
अनाम नायकों पर जोर: दूरदराज़ क्षेत्रों में कार्यरत उन व्यक्तियों को सम्मान, जिनका योगदान पहले अनदेखा रह जाता था जन-भागीदारी: नामांकन प्रक्रिया को जनता के लिए खोलकर इसे एक लोकतांत्रिक जन आंदोलन का स्वरूप दिया गया।समग्र प्रभाव: केवल पेशेवर उपलब्धियों के बजाय सामाजिक प्रभाव और जनसेवा को प्राथमिकता।
पुस्तक के बारे में
“प्रधानमंत्री मोदी के अनमोल रत्न” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि उन विभूतियों के प्रति श्रद्धांजलि है, जिन्होंने निस्वार्थ भाव से राष्ट्रसेवा की है। डॉ. दर्शनी प्रिय की यह कृति पाठकों को देश के उन “रत्नों” से परिचित कराती है, जिनका साहस, दृढ़ संकल्प और सेवा-भाव भारत की प्रगति की असली नींव है।
जैसा कि पुस्तक में भावपूर्ण शब्दों में कहा गया है— “ये पुरस्कार विजेता केवल पदक धारक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक संपदा के जीवंत प्रतीक हैं। यह पुस्तक उनकी प्रेरणादायक यात्राओं को हर घर तक पहुँचाने का एक विनम्र प्रयास है।”