- राखी अरोड़ा
फैसले सुरक्षित रखने के बाद उन्हें सुनाने में हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि इस समस्या से निपटने के लिए जल्द ही देश के उच्च न्यायालयों के लिए समयबद्ध दिशानिर्देश (गाइडलाइंस) जारी किए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न केवल संबंधित पक्षों के अधिकारों को प्रभावित करती है, बल्कि न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। अदालत ने दो टूक कहा—
“न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के समान है।”
तय होगी समय सीमा
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित गाइडलाइंस में यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि किसी मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला एक निश्चित समय सीमा के भीतर सुनाया जाए। इसके साथ ही, लंबे समय से लंबित फैसलों की नियमित समीक्षा और निगरानी की व्यवस्था भी की जा सकती है।
जवाबदेही भी होगी तय
सुप्रीम कोर्ट इस दिशा में पारदर्शिता बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है। यदि किसी मामले में निर्णय देने में असामान्य देरी होती है, तो उसके कारणों को रिकॉर्ड में लाना और आवश्यक होने पर जवाबदेही तय करना भी इन गाइडलाइंस का हिस्सा हो सकता है।
आम जनता को राहत
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से न्याय प्रणाली में गति आएगी और आम नागरिकों को वर्षों तक फैसले का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे न्यायपालिका के प्रति जनता का भरोसा और मजबूत होगा I