श्री देवोत्थान सेवा समिति (पंजी.) द्वारा विश्व की ऐतिहासिक “अस्थि कलश विसर्जन यात्रा” के 25वें सिल्वर जुबली वर्ष के अवसर पर एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कश्मीरी गेट स्थित महाराजा अग्रसेन पार्क ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में दिल्ली की टीम ने मेजबानी करते हुए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से जुड़े सैकड़ों सहयोगियों का सम्मान किया, जो पिछले 25 वर्षों से इस पुण्य कार्य में निरंतर सहयोग दे रहे हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के स्पेशल कमिश्नर आईपीएस श्री देवेश चन्द्र श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि “निस्वार्थ भाव से किए गए कार्य में देवता भी वास करते हैं।” उन्होंने समिति के कार्यों की सराहना करते हुए इसे एक अद्वितीय और प्रेरणादायक मिशन बताया।

इस अवसर पर श्रीलंका की अशोक वाटिका में श्रीराम कथा का श्रवण कराने वाले राष्ट्रसंत श्री अजय भाई जी, झंडेवालान मंदिर के महंत श्री राज राजेश्वरानंद जी महाराज, मरघट वाले हनुमान मंदिर के महंत श्री वरुण शर्मा, शिव नवग्रह धाम मंदिर चांदनी चौक के महंत श्री शिवशंकर जी महाराज, भाजपा युवा नेता रोहित गुप्ता सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

समिति के अध्यक्ष अनिल नरेंद्र ने बताया कि पिछले 25 वर्षों से पितृपक्ष में निकाली जाने वाली इस यात्रा में करीब 400 श्रद्धालुओं का काफिला दिल्ली से हरिद्वार जाता है। यात्रा के दौरान गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, रुड़की और हरिद्वार सहित कई स्थानों पर स्थानीय संगठन श्रद्धालुओं का स्वागत करते हैं और पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उन्होंने कहा कि सिल्वर जुबली वर्ष में समिति ने निर्णय लिया कि वर्षों से सहयोग कर रही यूपी और उत्तराखंड की टीम को दिल्ली बुलाकर सम्मानित किया जाए।
समिति के महामंत्री विजय शर्मा ने जानकारी दी कि इस अवसर पर 92 लोगों को महादेव के स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
आईपीएस देवेश चन्द्र श्रीवास्तव ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि देशभर से अनाम अस्थि कलशों को एकत्रित कर उन्हें विधि-विधान से हरिद्वार ले जाकर 100 किलो दूध की धारा के साथ वैदिक रीति से विसर्जित करना एक अत्यंत महान और दुर्लभ सेवा है। उन्होंने यह भी बताया कि समिति द्वारा पाकिस्तान से भी तीन बार में करीब 695 अस्थि कलश लाकर गंगा में विसर्जित किए गए, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक पहल है।
समिति अब तक 1,69,818 अस्थि कलशों का विसर्जन कर हुतात्माओं को मोक्ष दिलाने का कार्य कर चुकी है। कार्यक्रम के अंत में महादेव के प्रसाद के रूप में भंडारे का आयोजन भी किया गया।
यह आयोजन सेवा, श्रद्धा और समर्पण की मिसाल बनकर उपस्थित जनसमूह के लिए प्रेरणा का स्रोत साबित हुआ।