उर्स के मुबारक मौके पर हज़रत बड़े ख़्वाजा उस्मान हारूनी (र.अ.) की बारगाह में अकीदतमंदों द्वारा फातिहा पेश की जाती है और पूरी आलम-ए-इंसानियत को दिली मुबारकबाद दी जाती है।
हज़रत ख़्वाजा उस्मान हारूनी (र.अ.) सूफी सिलसिले के महान संत और हज़रत ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (र.अ.) के पीर-ए-मुर्शिद रहे हैं। आपका उर्स हर साल शव्वाल महीने की 5 और 6 तारीख को अजमेर शरीफ में बड़े ही अकीदत और एहतराम के साथ मनाया जाता है।
इस मौके पर महफ़िल-ए-कव्वाली, लंगर का एहतमाम, फूल, इत्र और चादर पेश की जाती है। देश-विदेश से लाखों जायरीन हाजिरी देने पहुंचते हैं और अपनी मुरादें मांगते हैं। मन्नत पूरी होने पर अकीदतमंद अपनी मन्नत अदा करते हैं और दरगाह में हाज़िरी देकर शुक्र अदा करते हैं।
यह उर्स मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम देता है, जो समाज में अमन और सद्भाव को मजबूत बनाता है।