- योगश भट्ट
मेडिकल प्रवेश प्रणाली में सुधार को लेकर ‘सेव मेरिट सोसाइटी’ ने ‘एक राष्ट्र, एक काउंसलिंग’ लागू करने की जोरदार मांग उठाई है। राजधानी में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने वर्तमान एनईईटी आधारित प्रवेश प्रक्रिया को बिखरी, महंगी और जटिल बताते हुए कई गंभीर खामियों की ओर ध्यान आकर्षित किया।
सोसाइटी के अध्यक्ष वी.ए.आर.के. प्रसाद ने कहा कि 2011-12 में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद एनईईटी को एकल परीक्षा के रूप में लागू किया गया था, लेकिन काउंसलिंग और फीस में एकरूपता न होने से पारदर्शिता अधूरी रह गई है। वर्तमान व्यवस्था में छात्रों को अलग-अलग राज्यों और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी के माध्यम से कई बार आवेदन करना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि काउंसलिंग शेड्यूल में टकराव के कारण छात्र एक सीट छोड़कर दूसरी जगह चले जाते हैं, जिससे हजारों सीटें खाली रह जाती हैं। यह स्थिति छात्रों के मानसिक तनाव के साथ-साथ राष्ट्रीय संसाधनों की भी बड़ी हानि है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में फीस असमानता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। उदाहरण देते हुए बताया गया कि आंध्र प्रदेश में कुछ सीटों की वार्षिक फीस 15 हजार रुपये है, जबकि तेलंगाना में वही सीट 60 हजार रुपये तक में मिल रही है। डीम्ड विश्वविद्यालयों पर मनमानी फीस वसूली और पारदर्शिता की कमी के आरोप भी लगाए गए।
सोसाइटी ने खुलासा किया कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में 7000 से अधिक पीजी मेडिकल सीटें अब भी खाली हैं। इसे गंभीर बताते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से पात्रता में ‘शून्य पर्सेंटाइल’ तक छूट देने और कम शुल्क पर सीधे प्रवेश की अनुमति देने की मांग की गई, ताकि देश में डॉक्टरों की कमी को दूर किया जा सके।
संगठन ने केंद्र सरकार से ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ लागू करने, पूरे देश के लिए एकीकृत काउंसलिंग पोर्टल बनाने और निजी व डीम्ड विश्वविद्यालयों की फीस पर नियंत्रण लगाने की मांग की। सोसाइटी का कहना है कि ‘वन नेशन, वन एनईईटी’ का उद्देश्य केवल परीक्षा तक सीमित न रहकर प्रवेश प्रक्रिया में भी समानता सुनिश्चित करना होना चाहिए।