भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को समर्पित ‘भीलवाड़ा सुर संगम 2026’ के 13वें संस्करण का भव्य शुभारंभ आज कमानी ऑडिटोरियम में हुआ। एलएनजे भीलवाड़ा समूह द्वारा आयोजित इस प्रतिष्ठित संगीत समारोह के उद्घाटन दिवस पर शास्त्रीय संगीत प्रेमियों, कलाकारों और संस्कृति के रसिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
दो दिवसीय इस समारोह की पहली संध्या ने भावपूर्ण और ऊर्जावान माहौल के साथ कार्यक्रम की शानदार शुरुआत की। एक बार फिर यह मंच भारतीय संगीत विरासत के संरक्षण और संवर्धन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को सिद्ध करता नजर आया।
कार्यक्रम का शुभारंभ हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन से हुआ। पंडित केदार बोडस के शिष्य एवं पंडित राम मराठे की परंपरा से जुड़े युवा कलाकार भाग्येश मराठे ने अपनी सशक्त प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी गायकी में रागों की गहरी समझ, शुद्धता और भावनात्मक अभिव्यक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
इसके पश्चात कर्नाटक संगीत की विख्यात कलाकार एवं ‘संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2024’ से सम्मानित डॉ. जयंती कुमारेश ने सरस्वती वीणा वादन प्रस्तुत किया। उनके वादन में तकनीकी दक्षता, साधना और मधुरता का सुंदर संतुलन था, जिसने पूरे सभागार में शांति और आध्यात्मिकता का वातावरण निर्मित कर दिया। उल्लेखनीय है कि उन्हें ‘संगीता कलानिधि पुरस्कार 2026’ के लिए भी नामांकित किया गया है, जो कर्नाटक संगीत का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।

अपने संगीत यात्रा पर विचार साझा करते हुए भाग्येश मराठे ने कहा कि संगीत उनके लिए केवल एक कला नहीं, बल्कि एक परंपरा है, जिसे निष्ठा और समर्पण के साथ निभाना आवश्यक है। उन्होंने ‘रियाज़’ को एक आध्यात्मिक साधना बताते हुए कहा कि यह कलाकार को अपनी जड़ों से जोड़े रखता है।
डॉ. जयंती कुमारेश ने वीणा को ब्रह्मांडीय ध्वनि का स्वरूप बताते हुए कहा कि संगीत में वह शक्ति है, जो मन को शांति प्रदान करते हुए भौतिक और आध्यात्मिक जगत के बीच सेतु का कार्य करती है।
इस अवसर पर एलएनजे भीलवाड़ा समूह के चेयरमैन रवि झुनझुनवाला ने कहा कि ‘भीलवाड़ा सुर संगम’ के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय संगीत का उत्सव मनाना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक से यह मंच संगीत और समाज के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में कार्य कर रहा है तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ रहा है।
उद्घाटन दिवस पर दर्शकों की उत्साहजनक उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि शास्त्रीय संगीत आज भी लोगों के दिलों में विशेष स्थान रखता है। ऐसे आयोजन इसकी लोकप्रियता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
यह समारोह 5 अप्रैल को भी जारी रहेगा, जिसमें समान्वय सरकार और प्रख्यात शास्त्रीय गायक पंडित मुकुल शिवपुत्र की प्रस्तुतियां संगीत प्रेमियों के लिए एक और यादगार संध्या का वादा करती हैं।
प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला ‘भीलवाड़ा सुर संगम’ भारतीय शास्त्रीय संगीत के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो कलाकारों और श्रोताओं के बीच गहरे संबंध स्थापित करने में निरंतर योगदान दे रहा है।