- योगेश भट्ट
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मुद्दे पर व्यापक राष्ट्रीय स्तर पर लामबंदी का ऐलान किया। इसे “धर्म, आस्था और न्याय” से जुड़ा महत्वपूर्ण अभियान बताते हुए आयोजकों ने देश-विदेश के संतों और सनातन समाज से बड़ी भागीदारी का आह्वान किया।

याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी जी महाराज ने बताया कि 7 जून 2026 को तालकटोरा स्टेडियम में एक विशाल धर्म संसद आयोजित की जाएगी, जिसमें देश-विदेश के धर्माचार्य, शंकराचार्य, जगद्गुरु और महामंडलेश्वर शामिल होंगे। उन्होंने दावा किया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद में उनके पक्ष द्वारा न्यायालय में सभी आवश्यक प्रमाण प्रस्तुत किए जा चुके हैं और उन्हें न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है। साथ ही उन्होंने विरोधी पक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पास अपने दावों को सिद्ध करने के पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं और मामला अनावश्यक रूप से लंबित रखने का प्रयास किया जा रहा है। फलाहारी जी ने सभी सनातन अनुयायियों से इस आंदोलन में सक्रिय सहभागिता की अपील की। मुख्य संरक्षक एवं कार्यक्रम प्रभारी रूप सिंह नागर ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य देशभर के संतों, अखाड़ों और धार्मिक संगठनों को एक मंच पर लाना है। उन्होंने बताया कि इसके लिए देशव्यापी संपर्क अभियान चलाया जाएगा तथा विभिन्न स्थानों पर यात्राओं के माध्यम से जनसमर्थन जुटाया जाएगा। उनके अनुसार, यह विषय करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है और इसे लेकर समाज में व्यापक जागरूकता आवश्यक है। कार्यक्रम की सह-प्रभारी एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सोनिया ठाकुर ने इसे सनातन समाज की सामूहिक आस्था का प्रश्न बताते हुए कहा कि प्रस्तावित धर्म संसद में लाखों लोगों की भागीदारी की उम्मीद है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से संदेश को देशभर में पहुंचाने पर जोर दिया और दिल्ली, मथुरा, आगरा व वृंदावन सहित विभिन्न क्षेत्रों से अधिकाधिक लोगों को इसमें शामिल होने का आह्वान किया।
एपी सिंह सहित अन्य वक्ताओं ने भी एक स्वर में कहा कि धर्म संसद के माध्यम से अपने पक्ष को संगठित और सशक्त रूप से प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं और इसे आने वाले समय में व्यापक जनआंदोलन का रूप देने की रणनीति पर कार्य किया जा रहा है।