मेजर जनरल (रि.) भुवन चंद्र खण्डूरी, एवीएसएम का जीवन भारतीय सैनिक परंपरा, राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और जनसेवा का अद्वितीय उदाहरण रहा। 1 अक्टूबर 1934 को देहरादून में जन्मे खण्डूरी जी ने अपने जीवन के हर क्षेत्र में कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनके पिता स्वर्गीय जय बल्लभ खण्डूरी और माता स्वर्गीय दुर्गा देवी खण्डूरी से मिले संस्कारों की छाप उनके पूरे सार्वजनिक जीवन में स्पष्ट दिखाई देती थी।
उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से विज्ञान की शिक्षा प्राप्त करने के बाद राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना और 1954 में भारतीय सेना की कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स में कमीशन प्राप्त किया। इसके बाद पुणे स्थित कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग, वेलिंगटन के डिफेन्स सर्विसेज स्टाफ कॉलेज तथा इंग्लैंड के रिज़र्व स्टाफ कॉलेज सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने सैन्य नेतृत्व और प्रशासनिक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
भारतीय सेना में लगभग 36 वर्षों की सेवा के दौरान उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेष रूप से 1971 के युद्ध में जम्मू-कश्मीर के सांबा सेक्टर में इंजीनियर रेजिमेंट के कमांडर के रूप में उनके नेतृत्व और रणनीतिक क्षमता की व्यापक सराहना हुई। सेना में उन्होंने आर्मी मुख्यालय में डायरेक्टर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़, इंजीनियर ब्रिगेड कमांडर, चीफ इंजीनियर तथा अतिरिक्त महानिदेशक जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं। उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1982 में अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से सम्मानित किया।
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने राष्ट्रसेवा का मार्ग नहीं छोड़ा और सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। 1991 में वे पहली बार गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। जनता के विश्वास और उनके स्वच्छ व्यक्तित्व के कारण वे कई बार लोकसभा पहुंचे और संसद की विभिन्न महत्वपूर्ण समितियों में प्रभावी भूमिका निभाई।
जगन नेगी ने मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूडी जी को दी भावभीनी श्रद्धांजलि सामाजिक कार्यकर्ता जगन नेगी ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं प्रख्यात जननेता श्रद्धेय मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूडी जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने शोक संदेश में जगन नेगी ने कहा कि मेजर जनरल खण्डूडी जी सिद्धांतों, ईमानदारी और अनुशासन के प्रतीक थे। उन्होंने एक सैनिक के रूप में देश की सीमाओं की रक्षा की तथा एक राजनेता के रूप में उत्तराखंड के विकास की मजबूत नींव रखी। उनका व्यक्तित्व सादगी, पारदर्शिता और जनसेवा के आदर्शों से परिपूर्ण था। जगन नेगी ने कहा कि जनरल साहब का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उत्तराखंड के प्रति उनका समर्पण और विकास की उनकी सोच सदैव याद रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि जनरल साहब का निधन केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति है। अंत में जगन नेगी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए कहा — “देवभूमि के इस महान सपूत को मेरा कोटि-कोटि नमन एवं भावभीनी अंतिम विदाई। ॐ शांति।”
उनकी प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए उन्हें भारत सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री बनाया गया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना और गोल्डन क्वाड्रिलेटरल जैसी ऐतिहासिक योजनाओं को गति देने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। देश के आधुनिक सड़क नेटवर्क के निर्माण में उनकी दूरदर्शी सोच आज भी याद की जाती है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में भी उनका कार्यकाल अनुशासन, पारदर्शिता और सुशासन के लिए जाना गया। 2007 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने प्रशासनिक सुधारों, वित्तीय अनुशासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए। वर्ष 2008 में उन्हें इंडिया टुडे द्वारा देश के सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री के रूप में सम्मानित किया गया।
2011 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने पर उन्होंने मजबूत लोकायुक्त कानून लागू कर भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को नई दिशा दी। नागरिक चार्टर, पारदर्शी स्थानांतरण नीति और प्रशासनिक सुधारों को उन्होंने प्राथमिकता दी।
राजनीति के अलावा सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। पूर्व सैनिकों के कल्याण, पर्वतीय संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक सेवा के अनेक कार्यों से वे जुड़े रहे। समाज सेवा के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें मदर टेरेसा इंटरनेशनल अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया।
मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूरी का व्यक्तित्व सैनिक अनुशासन, सादगी, स्पष्टवादिता और जनसेवा का अद्भुत संगम था। उन्होंने हमेशा यह संदेश दिया कि सत्ता विशेषाधिकार नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है।
सैनिक, सांसद, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और समाजसेवी—हर भूमिका में उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। देवभूमि उत्तराखंड के इस महान सपूत को शत-शत नमन।
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