नई दिल्ली। देश की राजधानी की पहचान बन चुकी दिल्ली मेट्रो को लेकर एक बार फिर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। दिल्ली कांग्रेस ने एक विस्तृत प्रचार पोस्टर जारी कर आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का दावा है कि दिल्ली मेट्रो की नींव, विस्तार और सबसे बड़े फैसले कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में हुए, जबकि बाद की सरकारों ने इसकी गति को कमजोर किया।
कांग्रेस द्वारा जारी पोस्टर में कहा गया है कि दिल्ली मेट्रो के पहले तीन चरणों की मंजूरी कांग्रेस नेतृत्व वाली केंद्र सरकारों ने दी। इसमें उल्लेख किया गया है कि—
19 जुलाई 1994 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव ने फेज-1 को मंजूरी दी।
30 अगस्त 2005 को तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने फेज-2 को स्वीकृति दी।
09 अगस्त 2011 को फेज-3 को मंजूरी प्रदान की गई।
पोस्टर के अनुसार दिल्ली मेट्रो के कुल 416 किलोमीटर नेटवर्क में से लगभग 351 किलोमीटर का निर्माण कांग्रेस शासनकाल में स्वीकृत किया गया, जिसकी लागत करीब 70,751 करोड़ रुपये रही।
कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल को मेट्रो विकास का “स्वर्णिम दौर” बताते हुए दावा किया कि उनकी सरकार ने लगातार 15 वर्षों तक दिल्ली के बजट का बड़ा हिस्सा मेट्रो परियोजनाओं पर खर्च किया। वहीं AAP सरकार पर आरोप लगाया गया कि उसने मेट्रो विस्तार में अपेक्षित आर्थिक सहयोग नहीं दिया।
पोस्टर में यह भी आरोप लगाया गया कि वर्ष 2022-23 में दिल्ली सरकार का मेट्रो में योगदान घटकर केवल 670 करोड़ रुपये रह गया, जो DMRC के इतिहास में पहली बार इतना कम बताया गया है। कांग्रेस ने इसे “मेट्रो विस्तार की रफ्तार थमने” का कारण बताया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कांग्रेस सांसद अजय माकन ने भाजपा और AAP दोनों पर हमला बोलते हुए कहा—
“दिल्ली मेट्रो का सपना कांग्रेस ने देखा, उसे जमीन पर कांग्रेस ने उतारा और उसके लिए पैसा भी कांग्रेस सरकारों ने दिया। AAP ने मेट्रो नहीं बनाई, सिर्फ फीते काटे। भाजपा और AAP ने मिलकर दिल्ली मेट्रो के इंजन की रफ्तार तोड़ दी।”
कांग्रेस ने फेज-4 परियोजना को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि मंजूरी मिलने के कई वर्षों बाद भी कई स्टेशनों और लाइनों पर कार्य की गति धीमी बनी हुई है।
हालांकि AAP और BJP की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिल्ली में आगामी चुनावों को देखते हुए विकास परियोजनाओं का श्रेय लेने की राजनीति अब और तेज होने वाली है।