विश्व बंधुत्व, साहित्य और संस्कृति के संगम का बना भव्य मंच
हो-ची-मिन्ह सिटी (वियतनाम)। अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के तत्वावधान में वियतनाम की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक नगरी हो-ची-मिन्ह सिटी में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव विश्व बंधुत्व, सांस्कृतिक समन्वय और साहित्यिक सौहार्द का अद्भुत उदाहरण बनकर उभरा। गीत, संगीत, नृत्य, कविता और विचार-विमर्श से सजे इस भव्य आयोजन में हिंदी के वरिष्ठ एवं वैश्विक ख्यातिप्राप्त साहित्यकार पंडित सुरेश नीरव को उनकी दीर्घकालीन, अनवरत और उत्कृष्ट साहित्य साधना के लिए प्रतिष्ठित ‘हो-ची-मिन्ह सम्मान’ से अलंकृत किया गया।
यह सम्मान वियतनाम की प्रतिष्ठित व्यक्तित्व क्वी बा जेनी हाइन ने प्रदान किया। सम्मान ग्रहण करते हुए पंडित सुरेश नीरव ने इसे भारतीय भाषा-साहित्य और विश्व मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित सभी साहित्यकारों का सम्मान बताया।

इसी अवसर पर बेंगलुरु (कर्नाटक) की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था साहित्य साधना मंच के अध्यक्ष एवं प्रख्यात साहित्यकार ज्ञानचंद मर्मज्ञ तथा वरिष्ठ साहित्यकार शरद सिंह ने पारंपरिक कर्नाटक शैली में पंडित सुरेश नीरव का अभिनंदन करते हुए उन्हें संस्था के सर्वोच्च सम्मान ‘सृजन तीर्थ सम्मान’ से विभूषित किया।
महोत्सव में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी साहित्यकारों और संस्कृति प्रेमियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया) से अर्चना नायर तथा सिंगापुर से पूजा श्रीवास्तव और स्मिता श्रीवास्तव विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का उद्घाटन भारतीय सेना के सेवानिवृत्त मेजर जनरल अनूप कुमार वी (सेना मेडल) ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात गीतकार ज्ञानचंद मर्मज्ञ तथा वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. संजीव कुमार उपस्थित रहे, जबकि समारोह की अध्यक्षता पंडित सुरेश नीरव ने की।
इस अवसर पर प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. प्रकाश उपाध्याय ‘क्षितिज’ के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केंद्रित ‘प्रज्ञान विश्वम्’ पत्रिका का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन गुजरात की सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. राखी सिंह कटियार ने किया।
महोत्सव का शुभारंभ छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना डॉ. अनुराधा दुबे की मनोहारी गणेश वंदना से हुआ। इसके पश्चात केरल की सुप्रसिद्ध गायिका मीरा नायर ने पंडित सुरेश नीरव की चर्चित ग़ज़ल ‘वियतनाम वंदना’ की संगीतमय प्रस्तुति देकर उपस्थित जनों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भारत के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा में आए प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में “विविधता में एकता” का अनुपम दृश्य प्रस्तुत किया। आयोजन के दौरान सभी प्रतिभागियों को सम्मान-पत्र, मोती की माला एवं अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
सम्मानित होने वालों में अनूप नायर, मधु मिश्रा, ज्ञानचंद मर्मज्ञ, शरद सिंह, डॉ. संजीव कुमार, मीरा नायर, विनय कुमार, ममता कांति, डॉ. मनोरमा अवस्थी, डॉ. सविता चड्ढा, सरोजिनी चौधरी, डॉ. प्रकाश उपाध्याय ‘क्षितिज’, विजय प्रशांत, कुमार सुबोध, स्मृति श्रीवास्तव, विष्णु श्रीवास्तव, कन्हैया लाल भ्रमर, भगवती देवी, गीतेश्वर बाबू ‘घायल’, वंदना योगी, अर्चना नायर तथा रोशनी नायर सहित अनेक साहित्यकार एवं संस्कृति साधक शामिल रहे।
महोत्सव के दूसरे दिन आयोजित शैक्षिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने गीत, भजन, कविताओं और साहित्यिक संवादों के माध्यम से आत्मीयता और सौहार्द का वातावरण निर्मित किया। तीन दिवसीय यह अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव साहित्य, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के संदेश के साथ अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
यह आयोजन न केवल साहित्यिक प्रतिभाओं के सम्मान का अवसर बना, बल्कि विश्व बंधुत्व, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और मानवीय एकता के संदेश को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सफल रहा।