नई दिल्ली स्थित श्रीराम भारतीय कला केंद्र, मंडी हाउस में पद्मश्री वीरेंद्र प्रभाकर की स्मृति में ‘युग-युग की सत्य कथा’ संपूर्ण रामलीला का मंचन किया गया। चित्र कला संगम की ओर से आयोजित इस प्रस्तुति में कलाकारों ने तीन घंटे में संपूर्ण रामकथा को साकार किया। युद्ध दृश्यों ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। इस अवसर पर प्रभाकर के परिजन कलाकारों के साथ।
- राजेश मित्तल
पद्मश्री वीरेंद्र प्रभाकर की स्मृति में श्रीराम भारतीय कला केंद्र, मंडी हाउस में ‘युग-युग की सत्य कथा’ संपूर्ण रामलीला का भव्य मंचन किया गया। चित्र कला संगम के तत्वावधान में आयोजित इस प्रस्तुति में कलाकारों ने महज तीन घंटे में संपूर्ण रामकथा को जीवंत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
रामलीला के युद्ध दृश्यों में मयूरभंज छऊ और कलरिपयट्टु जैसी पारंपरिक भारतीय कलाओं का अनूठा संगम प्रमुख आकर्षण रहा। भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, त्याग और धर्म की विजय को दर्शाती प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा। खचाखच भरे सभागार में कलाकारों के अभिनय और प्रभावशाली मंचन ने विशेष छाप छोड़ी।
संस्था के उपाध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद अशोक जैन और रवि जैन ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य भारतीय कला, संस्कृति और फोटोजर्नलिज्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पद्मश्री वीरेंद्र प्रभाकर को श्रद्धांजलि अर्पित करना है। वर्ष 1982 में पद्मश्री से सम्मानित प्रभाकर देश के प्रतिष्ठित प्रेस फोटो जर्नलिस्ट थे। उनकी खींची लगभग 15 हजार समाचार तस्वीरें विभिन्न राष्ट्रीय समाचार पत्रों के मुखपृष्ठों पर प्रकाशित हुई थीं।
रवि जैन ने कहा कि एक ही दिन में संपूर्ण रामकथा का मंचन इस रामलीला की विशिष्ट पहचान है, जिसका दिल्ली के दर्शकों को प्रतिवर्ष इंतजार रहता है। कार्यक्रम में समाजसेवी नरेश जैन, श्री धार्मिक लीला कमेटी के महासचिव धीरज धर गुप्ता और नवश्री धार्मिक लीला कमेटी के अशोक मित्तल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।