जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर एक आरोपी को नियमित जमानत देने से जुड़े दो संदिग्ध न्यायिक आदेश सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार दोनों आदेशों के रजिस्ट्रेशन नंबर और अन्य जानकारियों में अंतर मिलने से उनकी प्रामाणिकता पर सवाल उठे हैं।
क्या है मामला
रिपोर्ट के अनुसार मामला पंजाब निवासी 53 वर्षीय एक आरोपी से जुड़ा है। उसे श्रीगंगानगर जिले में 8.061 किलो अफीम की कथित बरामदगी के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
राजियासर थाने में उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धाराओं 8/18, 25 और 29 के तहत मामला दर्ज है। इस प्रकरण में 15 अक्टूबर और 26 अक्टूबर 2026 की तारीख वाले दो आदेश सामने आए हैं।
दोनों आदेशों में क्या लिखा है
26 अक्टूबर के कथित आदेश में जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा का नाम है। इसमें आरोपी की नियमित जमानत अर्जी मंजूर करने और उसकी अंतरिम जमानत को नियमित जमानत में बदलने की बात कही गई है।
15 अक्टूबर के दूसरे कथित आदेश में नियमित जमानत अर्जी को वकील की ओर से पैरवी न किए जाने के आधार पर निस्तारित बताया गया है।
वकील का पक्ष
आरोपी की ओर से 6 मई को अंतरिम जमानत की पैरवी करने वाले अधिवक्ता कैलाश खिलेरिया के अनुसार उन्होंने बाद में नियमित जमानत की अर्जी भी लगाई थी, ताकि 30 दिन की अंतरिम जमानत अवधि पूरी होने के बाद उस पर सुनवाई हो सके। उनके मुताबिक अवधि खत्म होने पर आरोपी ने सरेंडर नहीं किया, इसलिए उन्होंने नियमित जमानत अर्जी पर पैरवी नहीं करने का फैसला किया।
खिलेरिया ने बताया कि अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद से आरोपी फरार है। उनके अनुसार आरोपी के बेटे ने बाद में एनओसी लेकर केस की फाइल उनसे ले ली थी।
उन्होंने कहा कि एक दिन पहले सूरतगढ़ के एक वकील ने उन्हें बताया कि हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिल गई है। संदेह होने पर उन्होंने मंगलवार को जस्टिस शर्मा की एकलपीठ के स्टाफ से इसकी पुष्टि के लिए संपर्क किया।
रजिस्ट्रेशन नंबर पर सवाल
खिलेरिया के मुताबिक मंगलवार को जस्टिस शर्मा खंडपीठ में बैठ रहे थे और उस दिन उनकी एकलपीठ की कोई ऐसी कॉज लिस्ट नहीं थी, जिसमें यह मामला दर्ज हो। इसके बावजूद कथित आदेश मंगलवार शाम तक वेबसाइट पर देखने और डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध था।
हाईकोर्ट के एक कर्मचारी के अनुसार मंगलवार शाम तक 2026 में आपराधिक जमानत अर्जियों के रजिस्ट्रेशन नंबर 15,047 तक पहुंचे थे। जबकि 26 अक्टूबर के कथित आदेश पर 15,786 नंबर दर्ज है और 15 अक्टूबर के कथित आदेश पर 18,756 लिखा है।
अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी ने भी 26 अक्टूबर के कथित आदेश की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए। उनके अनुसार आदेश में सरकारी पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता के रूप में ए. शर्मा का नाम है, जबकि इस नाम का कोई व्यक्ति फिलहाल हाईकोर्ट में सरकारी अधिवक्ता के पद पर कार्यरत नहीं है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
हाईकोर्ट प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि न्यायिक शाखा से रिपोर्ट मांगी गई है। इसमें पता लगाया जाएगा कि दोनों कथित आदेश आधिकारिक वेबसाइट पर कैसे अपलोड हुए।
रजिस्ट्रार (न्यायिक) नरेंद्र कुमार ने कहा कि मामले में जांच चल रही है। उनके अनुसार उचित कार्रवाई के बाद ही इस पर विस्तार से टिप्पणी की जा सकेगी।
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स्रोत: अमर उजाला। फोटो: KATRIN BOLOVTSOVA / Pexels