केमिकल के छिड़काव से सफेद झाग गायब, लेकिन प्रदूषण का संकट बरकरार
राखी स्वरूप शर्मा
दिल्ली की यमुना नदी में जहरीले झाग और प्रदूषण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। नदी की सतह पर सफेद झाग को खत्म करने के लिए डिफोमर (Defoamer) अथवा एंटी-फोमिंग केमिकल का छिड़काव किया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या झाग हटाना ही यमुना की सफाई है, या फिर प्रदूषण की जड़ तक पहुंचकर स्थायी समाधान तलाशने की जरूरत है?
दिल्लीवासियों को याद होगा कि पिछली सरकार के दौरान मंत्री प्रवेश वर्मा यमुना के झागदार पानी में उतरकर तत्कालीन केजरीवाल सरकार पर तीखे हमले करते थे। आज सत्ता में होने के बावजूद यमुना की समस्या का स्थायी समाधान सामने नहीं आया है। दोषारोपण करना आसान है, लेकिन वर्षों से चली आ रही समस्या का समाधान करना कहीं अधिक कठिन।
झाग हटाने की कोशिश, प्रदूषण का सवाल कायम
यमुना की सतह पर बनने वाले सफेद झाग का प्रमुख कारण अनुपचारित सीवेज, घरेलू डिटर्जेंट, औद्योगिक अपशिष्ट और पानी में मौजूद सर्फेक्टेंट हैं। ओखला बैराज जैसे स्थानों पर पानी की हलचल के कारण झाग अधिक दिखाई देता है।
झाग को नियंत्रित करने के लिए नावों से डिफोमर का छिड़काव किया जाता है। ये रसायन बुलबुलों को तोड़कर झाग कम कर सकते हैं, लेकिन नदी में मौजूद सीवेज, बैक्टीरिया और अन्य प्रदूषकों को समाप्त नहीं करते। ऐसे में झाग का गायब होना नदी के साफ होने का प्रमाण नहीं है।
स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक है प्रदूषित पानी?
प्रदूषित यमुना के पानी और झाग के संपर्क में आने से त्वचा में जलन, खुजली, लालिमा और आंखों में परेशानी हो सकती है। दूषित पानी निगलने पर पेट संबंधी संक्रमण, उल्टी-दस्त तथा अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
रासायनिक धुंध या एरोसोल के संपर्क में आने से सांस और गले में जलन हो सकती है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों तथा अस्थमा के मरीजों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
डिफोमर के प्रभाव उसकी रासायनिक संरचना, मात्रा और संपर्क की अवधि पर निर्भर करते हैं। इसलिए इस्तेमाल किए जा रहे रसायनों की जानकारी, पर्यावरणीय परीक्षण और स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा मानकों को सार्वजनिक करना आवश्यक है।
छठ पूजा और धार्मिक आस्था पर भी चिंता
यमुना किनारे छठ पूजा जैसे धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं का नदी के पानी से संपर्क बढ़ जाता है। ऐसे में प्रशासन को घाटों पर प्रदूषण की स्थिति, पानी की गुणवत्ता और संभावित स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। श्रद्धालुओं को दूषित पानी में उतरने और उसे निगलने से बचना चाहिए।
स्थायी समाधान कब?
यमुना की सफाई केवल झाग हटाने या अस्थायी रसायनों के छिड़काव से संभव नहीं है। इसके लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाना, नालों के गंदे पानी का उपचार, औद्योगिक प्रदूषण पर सख्ती और नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण जरूरी हैं।
यमुना दिल्ली की जीवनरेखा है। इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बनाने के बजाय जनस्वास्थ्य, पर्यावरण और धार्मिक आस्था से जुड़े गंभीर मुद्दे के रूप में देखना चाहिए।
दिल्लीवासियों को झाग रहित यमुना नहीं, बल्कि स्वच्छ और सुरक्षित यमुना चाहिए।