मुंबई। राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) की मुंबई पीठ ने वीडियोकॉन समूह के प्रवर्तक वेणुगोपाल धूत को दिवालिया घोषित कर दिया है। मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, यह आदेश गुरुवार को आया और मामला भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के 12,668 करोड़ रुपये के दावे से जुड़ा है। पीठ ने कहा कि वेणुगोपाल धूत, जो इस मामले में व्यक्तिगत गारंटर हैं, दिवालिया घोषित किए जाते हैं।
ट्रस्टी की नियुक्ति और आगे की प्रक्रिया
अधिकरण ने आशीष नारायण को दिवालिया मामले का ट्रस्टी नियुक्त किया है। वेणुगोपाल धूत को सात दिन के भीतर अपनी वित्तीय स्थिति का पूरा ब्योरा देना होगा। ट्रस्टी लेनदारों से दावे आमंत्रित करेंगे और 90 दिन में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपेंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, धूत की दिवालिया संपत्ति ट्रस्टी के पास चली जाएगी। ट्रस्टी उसका प्रबंधन करेंगे और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के अनुसार वसूली की रकम लेनदारों में बांटेंगे।
समाधान योजना क्यों विफल रही
यह आदेश धूत की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया के विफल होने के बाद आया है। यह प्रक्रिया 8 अप्रैल को शुरू हुई थी, जब NCLT मुंबई ने SBI की याचिका को स्वीकार किया था। धूत ने इस दौरान 600 करोड़ रुपये की चुकौती योजना रखी थी।
इस योजना में सिलीगुड़ी की एक रियल एस्टेट परियोजना से मिलने वाले पैसे के जरिये 36 महीने में भुगतान की बात थी। लेनदारों ने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने परियोजना पर निर्भरता, नियामकीय मंजूरियों और भविष्य के नकदी प्रवाह की अनिश्चितता को कारण बताया। योजना में कोई शुरुआती भुगतान भी नहीं था।
रिपोर्ट के अनुसार, NCLT ने 17 जुलाई को यह योजना ठुकरा दी और व्यक्तिगत दिवाला प्रक्रिया समाप्त कर दी। इससे लेनदारों के लिए दिवालिया कार्यवाही शुरू करने का रास्ता खुला।
SBI के दावे की पृष्ठभूमि
मिंट के अनुसार, वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज और वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस ने 2010 और 2012 में SBI व अन्य बैंकों से कर्ज और कार्यशील पूंजी की सुविधाएं ली थीं। धूत ने प्रवर्तक के तौर पर इन कर्जों के लिए निजी गारंटी दी थी। कंपनियों के चूक करने पर SBI ने फरवरी 2018 में ये गारंटी लागू कर दीं।
SBI का कुल दावा 12,668.06 करोड़ रुपये का है। इसमें रुपया टर्म लोन के 9,322.10 करोड़, वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस की सुविधा के 1,437.76 करोड़ और कार्यशील पूंजी के 1,908.19 करोड़ रुपये शामिल हैं, जिनमें ब्याज और जुर्माना भी जुड़ा है।
धूत ने समयसीमा के आधार पर कार्यवाही को चुनौती दी थी। उनका एक तर्क यह भी था कि एक गारंटी SBI के बजाय SBICAP ट्रस्टी कंपनी के पक्ष में दी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, NCLT ने ये आपत्तियां खारिज कर दीं।
वीडियोकॉन समूह का पतन
कभी देश के प्रमुख उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांडों में गिना जाने वाला वीडियोकॉन समूह दूरसंचार, तेल-गैस और डायरेक्ट-टू-होम टीवी में भी उतरा। मिंट के अनुसार, इस विस्तार के लिए समूह ने काफी हद तक कर्ज पर भरोसा किया। 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने 122 टेलीकॉम लाइसेंस रद्द किए, जिनमें वीडियोकॉन के लाइसेंस भी थे, और समूह की वित्तीय हालत बिगड़ गई।
वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज जून 2018 में कॉरपोरेट दिवाला प्रक्रिया में गई। लेनदारों ने समूह के खिलाफ करीब 64,500 करोड़ रुपये के दावे स्वीकार किए। 2021 में NCLT ने ट्विन स्टार टेक्नोलॉजीज की 2,962 करोड़ रुपये की समाधान योजना को मंजूरी दी थी।
NCLAT ने जनवरी 2022 में यह मंजूरी रद्द कर दी। ट्विन स्टार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, जहां फरवरी 2022 से यथास्थिति बनी हुई है और मामला लंबित है। मिंट के अनुसार, SBI, ट्रस्टी और धूत की ओर से रिपोर्ट छपने तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
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स्रोत: Mint। फोटो: KATRIN BOLOVTSOVA / Pexels