भारत ने बच्चों के खिलाफ अपराधों की रोकथाम की वैश्विक लड़ाई में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से संचालित अपनी तरह का पहला प्रौद्योगिकी-सक्षम टूल ‘रक्षा’ लॉन्च किया है। यह टूल बच्चों की ट्रैफिकिंग, बाल विवाह तथा बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (सी-सीम) की रोकथाम के लिए विकसित किया गया है।
‘रक्षा’ को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने ‘प्रॉस्पेरिटी फ्यूचर्स: चाइल्ड सेफ्टी टेक समिट’ में लॉन्च किया। यह सम्मेलन इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 (16–20 फरवरी) का आधिकारिक प्री-समिट कार्यक्रम था, जिसे जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) ने इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया।
‘रक्षा’ देशभर के बच्चों से संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण कर एआई कीक उपयोग से संवेदनशील क्षेत्रों का रीयल-टाइम मानचित्रण, जोखिमग्रस्त बच्चों व समुदायों की पहचान, ट्रैफिकिंग नेटवर्क की निगरानी, स्रोत-गंतव्य ट्रैकिंग तथा शोषण के उभरते रुझानों की पहचान करता है।

डिजिटल माध्यम से सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा,
“प्रौद्योगिकी का वास्तविक मूल्यांकन समाज के सबसे संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा में निहित है। ‘रक्षा’ बच्चों के लिए सुरक्षित, समावेशी और सशक्त डिजिटल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।”
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा कि ‘रक्षा’ तकनीक के माध्यम से दुनिया का सबसे समग्र बाल संरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की दिशा में भारत के नेतृत्व को दर्शाता है। यह प्लेटफॉर्म डेटा को ठोस कार्रवाई में बदलते हुए रोकथाम, पहचान और न्याय तक पहुंच को मजबूत करता है।
सांसद लावू श्रीकृष्ण देवरायलु ने कहा कि एआई अब केवल प्रतिक्रिया नहीं बल्कि पूर्वानुमान आधारित रोकथाम का माध्यम बन चुका है, जिससे बच्चों के खिलाफ अपराधों को समय रहते रोका जा सकता है।

‘रक्षा’ तीन प्रमुख टूल्स पर आधारित है—
बाल विवाह की रोकथाम के लिए आर्थिक असुरक्षा कम करना
ट्रैफिकिंग जैसे संगठित अपराधों की पहचान व निगरानी
डिजिटल बाल संरक्षण, जिसमें सी-सीम से जुड़े ऑनलाइन हीट जोन और आईपी ट्रैकिंग शामिल है
दिनभर चले इस शिखर सम्मेलन में नीति, तकनीक, कानून प्रवर्तन, शिक्षा और नागरिक समाज से जुड़े विशेषज्ञों ने एआई की भूमिका, डिजिटल जोखिम, अधिकारों और जिम्मेदारियों पर व्यापक विमर्श किया।
नीति आयोग के सहयोग से जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने वर्ष 2025 में 20 लाख से अधिक संवेदनशील परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ा, 1.98 लाख बाल विवाह रोके और 55,000 से अधिक बच्चों को ट्रैफिकिंग व शोषण से मुक्त कराया। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय में जेआरसी की भूमिका से बाल यौन शोषण सामग्री को अपराध घोषित किया गया।
भारत सरकार द्वारा आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ग्लोबल साउथ में अपनी तरह का पहला आयोजन है, जिसमें एआई के भविष्य और वैश्विक नेतृत्व में भारत की भूमिका पर चर्चा होगी।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
जितेंद्र परमार, 8595950825