Skip to content
January 25, 2026
  • Facebook
  • Youtube
  • X (Twitter)
  • Instagram

Rashtra Times

Largest Hindi Weekly newspaper of india

Primary Menu
  • Home
  • राजनीति
  • E-Paper
  • दुनिया
  • धार्मिक
  • तकनीक
  • Astrology
  • मनोरंजन
  • Astrology
  • बिज़नेस
  • Polls
  • स्वास्थ्य
  • खेल
वीडियो समाचार
  • Home
  • 2026
  • January
  • 22
  • बिज़नेस
  • रिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया: अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी
  • बिज़नेस

रिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया: अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी

rashtratimesnewspaper January 22, 2026 1 min read
rupee_against_dollar

उमेश जोशी

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की लगातार गिरावट अब केवल मुद्रा बाजार की एक खबर भर नहीं रह गई है, बल्कि यह देश की व्यापक आर्थिक सेहत का आईना बन चुकी है। जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच रुपये में लगभग 5 से 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। 20 जनवरी 2026 को रुपया 90.92–90.93 प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जो न केवल ऐतिहासिक निचले स्तरों के बेहद करीब है, बल्कि नीति-निर्माताओं के लिए भी एक स्पष्ट चेतावनी है कि वैश्विक और घरेलू दबावों के सामने भारतीय अर्थव्यवस्था कितनी संवेदनशील बनी हुई है।
बीते वर्ष की शुरुआत में जहां डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित नजर आ रही थी, वहीं वर्ष के उत्तरार्ध में वैश्विक घटनाक्रमों और घरेलू कमजोरियों ने मिलकर मुद्रा पर दबाव बढ़ा दिया। अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता, डॉलर की मजबूती, भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की सतर्कता ने उभरते बाजारों की मुद्राओं को कमजोर किया। दिसंबर 2025 में रुपया 91.38 तक फिसल गया, जिसे अब तक का रिकॉर्ड निचला स्तर माना जा रहा है। जनवरी 2026 में भी यह दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और मुद्रा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।
रुपये की इस गिरावट का सबसे बड़ा असर आम अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। कमजोर रुपये के कारण कच्चा तेल, गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं का आयात महंगा हो गया है, जिसका सीधा प्रभाव महंगाई पर पड़ता है। पेट्रोल-डीजल से लेकर रोजमर्रा की वस्तुओं तक कीमतों में बढ़ोतरी ने आम आदमी की क्रय शक्ति को कमजोर कर दिया है। पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए यह स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है।
व्यापार घाटा भी रुपये की गिरावट का एक अहम पहलू बनकर उभरा है। आयात के महंगे होने और निर्यात से अपेक्षित लाभ न मिल पाने के कारण यह घाटा और गहराता जा रहा है। कमजोर रुपये से निर्यात को सैद्धांतिक रूप से बढ़ावा मिलना चाहिए था, लेकिन वैश्विक मांग में सुस्ती और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक अनिश्चितता के चलते यह फायदा सीमित ही रहा है। इसके अलावा डॉलर में लिया गया विदेशी कर्ज अब और महंगा साबित हो रहा है। कंपनियों के साथ-साथ सरकार पर भी कर्ज चुकाने का बोझ बढ़ा है, जिससे राजकोषीय दबाव स्पष्ट दिखाई देता है।
इस गिरावट के सामाजिक प्रभाव भी कम चिंताजनक नहीं हैं। विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्र, इलाज के लिए विदेश जाने वाले मरीज और आम पर्यटक — सभी के लिए खर्च अचानक बढ़ गया है। डॉलर के महंगे होने का सीधा असर इन वर्गों की जेब पर पड़ रहा है, जिससे रुपये की गिरावट केवल आंकड़ों का खेल न रहकर आम जीवन की वास्तविक समस्या बन जाती है।
यह सच है कि कमजोर रुपये से निर्यातकों, खासकर आईटी और फार्मा जैसे क्षेत्रों को कुछ हद तक लाभ मिलता है, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में यह लाभ अर्थव्यवस्था को समग्र राहत देने के लिए पर्याप्त नहीं है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने डॉलर बिक्री, तरलता प्रबंधन और अन्य मौद्रिक उपायों के जरिए अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने की कोशिश की है, जिससे स्थिति कुछ हद तक संभली है। हालांकि, केवल अस्थायी हस्तक्षेप से स्थायी समाधान संभव नहीं है।
अंततः रुपये की मजबूती घरेलू आर्थिक आधार, निवेशकों के भरोसे, निर्यात क्षमता और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करती है। मौजूदा गिरावट इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अर्थव्यवस्था को केवल बाजार की ताकतों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। इसके लिए ठोस नीतिगत सुधार, उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने वाली रणनीतियाँ तथा आर्थिक संतुलन को मजबूत करने वाले दीर्घकालिक कदम अनिवार्य होंगे।

About Author

rashtratimesnewspaper

राष्ट्र टाइम्स हिंदी साप्ताहिक समाचारपत्र है, जो 1981 में शुरू किया गया था। यह समाचारपत्र भारत की राजधानी नई दिल्ली स्थित है और हर सप्ताह जारी किया जाता है। इस समाचारपत्र के उद्देश्य के रूप में देश और विदेश की ताजा घटनाओं की विस्तृत विवरण प्रदान करना और आधुनिक समाज में जागरूकता बढ़ाना शामिल है।

राष्ट्र टाइम्स को नई दिल्ली के प्रमुख समाचारपत्रों में से एक माना जाता है जिसका पैमाना देश और दुनिया भर में बड़े वर्गों तक होता है। इस समाचारपत्र का मुख्य आधार हिंदी भाषा है जिससे उन लोगों तक समाचार पहुंचता है जो अंग्रेजी नहीं जानते हैं।

इस समाचारपत्र में व्यापक क्षेत्रों पर विशेषज्ञता वाले न्यूज रिपोर्टरों और लेखकों की टीम है, जो उन विषयों पर विस्तृत रूप से विचार करते हैं जो उन्हें महत्वपूर्ण लगते हैं।

See author's posts

Post navigation

Previous: भरतपुर में 37वें सड़क सुरक्षा माह के अवसर पर क्विज प्रतियोगिता का आयोजनदिगंबर नर्सिंग कॉलेज में विद्यार्थियों ने दिखाई जागरूकता
Next: दिल्ली:1984 के दंगा मामलों से जुड़े केस में कोर्ट ने सज्जन कुमार को किया बरी

संबंधित कहानियां

WhatsApp Image 2026-01-15 at 11.38.33 AM
1 min read
  • बिज़नेस

ग्राहकों को मिलेगा गारंटीड बचत और जीवन सुरक्षा का भरोसा

rashtratimesnewspaper January 15, 2026 0
WhatsApp Image 2025-12-31 at 6.52.55 PM
1 min read
  • बिज़नेस
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय

एशिया और ओशिनिया में क्रिप्टो नियमन की नई दिशा: लाइसेंसिंग, स्टेबलकॉइन और टोकनाइज़ेशन पर फोकस

rashtratimesnewspaper December 31, 2025 0
WhatsApp Image 2025-12-02 at 16.26.42_2097a464
1 min read
  • बिज़नेस

बजट 2026 से पहले क्रिप्टो नीति में बदलाव की मांग तेज उच्च टैक्स और 1% TDS से निवेशकों में हतोत्साह

rashtratimesnewspaper December 2, 2025 0

लेखक के बारे में

Vijay Shankar Chaturvedi

ट्रेंडिंग समाचार

राष्ट्र टाइम्स, वर्षः 46, अंकः 04, नई दिल्ली, 25 से 31 जनवरी 2026 logo 1
  • E-Paper

राष्ट्र टाइम्स, वर्षः 46, अंकः 04, नई दिल्ली, 25 से 31 जनवरी 2026

January 24, 2026 0
मनरेगा खत्म करना गरीबों को ‘बंधुआ मजदूर’ बनाने की साजिश: खरगे kharge 2
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय

मनरेगा खत्म करना गरीबों को ‘बंधुआ मजदूर’ बनाने की साजिश: खरगे

January 22, 2026 0
एससी/एसटी कर्मचारियों के लिए वित्तीय सहायता में बढ़ोतरी : कुलजीत सिंह चहल 202601213647004 3
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय

एससी/एसटी कर्मचारियों के लिए वित्तीय सहायता में बढ़ोतरी : कुलजीत सिंह चहल

January 22, 2026 0
सरकार ने सिर्फ अपनी राजनीति के लिए मनरेगा कानून को बदला, आज मजदूर परेशान: कांग्रेस 202601223647310 4
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय

सरकार ने सिर्फ अपनी राजनीति के लिए मनरेगा कानून को बदला, आज मजदूर परेशान: कांग्रेस

January 22, 2026 0
दिल्ली:1984 के दंगा मामलों से जुड़े केस में कोर्ट ने सज्जन कुमार को किया बरी 202601223647156 5
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय

दिल्ली:1984 के दंगा मामलों से जुड़े केस में कोर्ट ने सज्जन कुमार को किया बरी

January 22, 2026 0
  • Share on Facebook
  • Share on Twitter
  • Share on LinkedIn

हो सकता है आप चूक गए हों

logo
  • E-Paper

राष्ट्र टाइम्स, वर्षः 46, अंकः 04, नई दिल्ली, 25 से 31 जनवरी 2026

rashtratimesnewspaper January 24, 2026 0
kharge
1 min read
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय

मनरेगा खत्म करना गरीबों को ‘बंधुआ मजदूर’ बनाने की साजिश: खरगे

rashtratimesnewspaper January 22, 2026 0
202601213647004
1 min read
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय

एससी/एसटी कर्मचारियों के लिए वित्तीय सहायता में बढ़ोतरी : कुलजीत सिंह चहल

rashtratimesnewspaper January 22, 2026 0
202601223647310
1 min read
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय

सरकार ने सिर्फ अपनी राजनीति के लिए मनरेगा कानून को बदला, आज मजदूर परेशान: कांग्रेस

rashtratimesnewspaper January 22, 2026 0

Meta

  • Log in
  • Entries feed
  • Comments feed
  • WordPress.org

नवीनतम

  • राष्ट्र टाइम्स, वर्षः 46, अंकः 04, नई दिल्ली, 25 से 31 जनवरी 2026
  • मनरेगा खत्म करना गरीबों को ‘बंधुआ मजदूर’ बनाने की साजिश: खरगे
  • एससी/एसटी कर्मचारियों के लिए वित्तीय सहायता में बढ़ोतरी : कुलजीत सिंह चहल
  • सरकार ने सिर्फ अपनी राजनीति के लिए मनरेगा कानून को बदला, आज मजदूर परेशान: कांग्रेस
  • दिल्ली:1984 के दंगा मामलों से जुड़े केस में कोर्ट ने सज्जन कुमार को किया बरी

श्रेणियाँ

  • E-Paper
  • Uncategorized
  • खेल
  • तकनीक
  • दुनिया
  • धार्मिक
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय
  • स्वास्थ्य
कॉपीराइट © सर्वाधिकार सुरक्षित rashtratimes | MoreNews by AF themes.