विजय शर्मा
राजधानी दिल्ली की जीवनरेखा माने जाने वाले दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की बदहाली का एक चौंकाने वाला और चिंताजनक उदाहरण राजधानी के हृदय स्थल सिंधिया हाउस स्थित डीटीसी पास सेक्शन में देखने को मिल रहा है। वर्षों पुरानी इस इमारत की हालत अब इतनी जीर्ण-शीर्ण और खतरनाक हो चुकी है कि यहां रोज़ाना आने वाले हजारों यात्रियों और कर्मचारियों की जान हर पल जोखिम में बनी रहती है।
डीटीसी पास बनवाने आने वाले बुजुर्गों, महिलाओं, छात्रों और दिव्यांग यात्रियों के मन में हमेशा यह दहशत बनी रहती है कि कहीं ऊपर से छत या प्लास्टर न गिर जाए। इमारत की दीवारों में दरारें साफ देखी जा सकती हैं, छत से झड़ता प्लास्टर और कमजोर ढांचा किसी बड़े हादसे का संकेत दे रहा है।
काउंटरों को दीमक ने पूरी तरह किया खोखला
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि डीटीसी पास सेक्शन के काउंटरों को दीमक पूरी तरह चाट चुकी है। लकड़ी के ढांचे इतने कमजोर हो चुके हैं कि वे कभी भी ढह सकते हैं। हैरानी की बात यह है कि आज भी काउंटरों और फर्नीचर पर दीमक चलते हुए साफ देखी जा सकती है, इसके बावजूद संबंधित अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
सबसे ज्यादा कमाई करने वाला केंद्र, फिर भी उपेक्षित
विडंबना यह है कि सिंधिया हाउस स्थित यह पास सेक्शन डीटीसी के सबसे अधिक राजस्व देने वाले केंद्रों में शामिल है। प्रतिदिन हजारों पास यहीं से बनाए और नवीनीकरण किए जाते हैं, जिससे डीटीसी को भारी आय होती है। बावजूद इसके, इस महत्वपूर्ण केंद्र की हालत वर्षों से बद से बदतर होती जा रही है।
स्थानीय नागरिकों और यात्रियों का कहना है कि कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन न तो डीटीसी प्रबंधन ने सुध ली और न ही दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग ने कोई ठोस कदम उठायाकिसी बड़े हादसे का इंतज़ार क्यों?
सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा? जब कभी भीड़ अधिक होती है, तब इस जर्जर इमारत में लोगों का खड़ा होना खुद में खतरे से खाली नहीं है। अगर समय रहते मरम्मत और पुनर्निर्माण नहीं कराया गया, तो यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
परिवहन मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
डीटीसी प्रबंधन और दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्री से पुरज़ोर मांग की जा रही है कि सिंधिया हाउस स्थित डीटीसी पास सेक्शन का तत्काल निरीक्षण कराया जाए, दीमक-रोधी उपचार के साथ पूर्ण मरम्मत या पुनर्निर्माण किया जाए,यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का यह अहम केंद्र फिर से सुरक्षित और सम्मानजनक रूप में कार्य कर सके।