नई दिल्ली। फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस (शिक्षक संगठन) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) से बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर को “विश्व रत्न” की उपाधि देने की अनुशंसा करने की मांग की है।
फोरम के चेयरमैन प्रो. हंसराज सुमन ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर आधुनिक भारत के निर्माता, संविधान शिल्पी, समाज सुधारक, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद, विधिवेत्ता और मानवाधिकारों के प्रबल समर्थक थे। सामाजिक न्याय, समानता, महिलाओं के अधिकार, श्रम सुधार और शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में निहित स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और न्याय के मूल्य डॉ. अम्बेडकर की दूरदर्शिता को दर्शाते हैं। उनके विचारों को विश्व के अनेक देशों में सम्मान मिला है तथा कई विश्वविद्यालयों में उनके नाम पर चेयर और अध्ययन केंद्र स्थापित किए गए हैं।
प्रो. सुमन ने पत्र में उल्लेख किया कि डॉ. अम्बेडकर की विरासत जाति, धर्म और क्षेत्र की सीमाओं से परे मानवता और सामाजिक न्याय की प्रेरणा है। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण अफ्रीका और कनाडा सहित कई देशों में उनकी प्रतिमाएं स्थापित हैं तथा उनकी जयंती मनाई जाती है।
फोरम ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि भारत और मानवता के प्रति डॉ. अम्बेडकर के योगदान को देखते हुए उन्हें “विश्व रत्न” सम्मान दिलाने हेतु UNO को औपचारिक अनुशंसा भेजी जाए।