एनईपी उच्च शिक्षण संस्थानों को बड़े बहु-विषयक विश्वविद्यालय क्लस्टर और ज्ञान केंद्रों में बदल देगा: डॉ के कस्तूरीरंगन

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# डॉ. के कस्तूरीरंगन ने कहा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के एक भाग के रूप में शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम की स्थापना की जाएगी।

# एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रोफेसर अनिल सहस्रबुद्धे ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति भविष्य में आत्मविश्वास से भरे भारत के निर्माण में मदद करेगी।

दिल्ली, 6 अक्टूबर, 2021:

शिक्षा मंत्रालय (MoE) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने 6 अक्टूबर को सफलतापूर्वक वेबिनार का आयोजन किया, जिसका विषय, ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: 21वीं सदी के युवाओं की आकांक्षाओं को साकार करना है।

 

उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ. के कस्तूरीरंगन, राष्ट्रीय शिक्षा नीति प्रारूप समिति के अध्यक्ष व पूर्व अध्यक्ष, इसरो (ISRO) थे।

 

उद्घाटन समारोह में संजय मूर्ति, माननीय सचिव, शिक्षा मंत्रालय, प्रमथ राज सिन्हा, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के संस्थापक डीन, हड़प्पा एजुकेशन के संस्थापक, अशोक विश्वविद्यालय, हरियाणा, प्रोफेसर एमके श्रीधर, प्रबंधन अध्ययन के पूर्व डीन, बैंगलोर विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय शैक्षिक नीति प्रारूप समिति के सदस्य, एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रोफेसर अनिल सहस्रबुद्धे, एआईसीटीई के उपाध्यक्ष प्रोफेसर एमपी पूनिया और एआईसीटीई सदस्य सचिव प्रोफेसर राजीव कुमार सहित प्रख्यात हस्तियां उपस्थित थे।

 

उद्घाटन भाषण के दौरान, डॉ के कस्तूरीरंगन ने भारतीय शैक्षिक क्षेत्र में क्रांति लाने के प्रयासों के लिए एआईसीटीई की सराहना की। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि एआईसीटीई ने राष्ट्रीय शैक्षिक नीति के अनुरूप, एक नियामक से एक सुविधाकर्ता और एक प्रवर्तक के रूप में परिवर्तन की दिशा में अपनी भूमिका का नवाचार किया है।

 

“राष्ट्रीय शिक्षा नीति उच्च शिक्षण संस्थानों को बड़े बहु-विषयक विश्वविद्यालयों और ज्ञान केंद्रों में बदल देगी, जिनमें से प्रत्येक में 3000 से अधिक छात्र होंगे। यह छात्रों को कलात्मक, रचनात्मक और विश्लेषणात्मक क्षमताओं के अनुरूप सभी तरह से सक्षम बनाएगा। इस प्रकार नीति सभी स्तरों पर संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर प्रकाश डालती है और अनुसंधान पर अधिक जोर देती है, चाहे वह मौलिक अनुप्रयुक्त अनुसंधान हो, अनुवाद संबंधी अनुसंधान हो और देश की विशिष्ट जरूरतों का विश्लेषण करने के लिए अनुसंधान हो।

 

डॉ. के कस्तूरीरंगन ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच एक नई इकाई है जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति द्वारा अनुशंसित किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच एक स्वायत्त निकाय है, और यह शिक्षकों और तकनीकी-उद्यमियों के बीच संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा।

 

डॉ के कस्तूरीरंगन ने आगे इस बात पर भी प्रकाश डाला कि “मुझे विश्वास है कि शैक्षिक प्रौद्योगिकियां उद्यमियों के लिए उपजाऊ डोमेन हैं, और मंच इन उद्यमियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा कि शिक्षक किस प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, ताकि वे प्रभावी तकनीकी समाधान विकसित कर सकें।”

 

एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रोफेसर अनिल सहस्रबुद्धे ने कहा कि “एआईसीटीई, अपनी सभी योजनाओं और प्रयासों के माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को पूरा करने का प्रयास कर रहा है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति हमारे छोटे बच्चों को सशक्त बनाने जा रही है। एआईसीटीई के पास अब एआई-पावर्ड ट्रांसलेशन टूल है, जिसे विशेष रूप से इंजीनियरिंग छात्रों के लिए डिज़ाइन किया गया है। जो शैक्षिक सामग्री का भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने में सक्षम है। अब हमारे पाठ्यक्रम में इंटर्नशिप शामिल हैं, ताकि छात्र नौकरी पाने के लिए एक कौशल सेट के साथ सामने आएंगे, जबकि कुछ अन्य जो उद्यमी बनना चाहते है उन्हें भी मदद मिलेंगी। मेरा दृढ़ विश्वास है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने वाले वर्षों में एक आश्वस्त भारत बनाएगी।”

 

शिक्षा मंत्रालय के सचिव माननीय संजय मूर्ति ने कहा कि, “राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने हमारे द्वारा अपनाए गए इस पूरे ढांचे में एकीकृत व्यावसायिक और कौशल का मार्ग पहले ही निर्धारित कर दिया है। हम उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं जहां नई शिक्षा नीति युवाओं को उच्च शिक्षण संस्थानों से बाहर आने के बाद उनको नौकरी पाने में मदद देगी। भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं में अंग्रेजी सामग्री का अनुवाद करने के लिए एआईसीटीई की महत्वपूर्ण पहल है।”

 

वहीं इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के डीन व अशोका विश्वविद्यालय हरियाणा में हड़प्पा शिक्षा के संस्थापक प्रमथ राज ने कहा कि, “25 से अधिक वर्षों तक छात्रों के साथ मिलकर काम करने के बाद, मुझे लगता है कि मैं उनकी आकांक्षाओं पर कुछ टिप्पणी कर सकता हूं। युवा एक ऐसा करियर चाहते हैं जो उनके जीवन को सुरक्षित कर सके, और वे एक उच्च जीवन स्तर चाहते हैं। उच्च शिक्षा संस्थान से बाहर आने के बाद अधिकांश छात्र नौकरी का आश्वासन चाहते हैं। उन्होंने ‘द ग्रेट इस्तीफे’ पर भी ध्यान केंद्रित किया, जहां 2020 में 50 मिलियन से अधिक युवाओं ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और वे अपने जीवन की प्राथमिकताएं एवं विकल्पों का पुनर्मूल्यांकन करना चाहते हैं।

 

प्रोफेसर एमके श्रीधर, प्रबंधन अध्ययन के पूर्व डीन, बैंगलोर विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय शैक्षिक नीति प्रारूप समिति के सदस्य ने कहा कि, “21वीं सदी के युवा बहुत साहसी और प्रयोगात्मक हैं। वे देश के लिए योगदान देना चाहते हैं। वे कुछ बहुत अलग बनाना चाहते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति वास्तव में उन दिमागों से जुड़ती है। यह केवल पाठ्यक्रम सीखने के बारे में नहीं है, यह सचमुच ऐसे दिमागों और ऐसी आकांक्षाओं को जोड़ता है।”

 

उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए एआईसीटीई के उपाध्यक्ष डॉ एमपी पूनिया ने कहा कि, “डॉ. के कस्तूरीरंगन एक बहुत ही गतिशील व्यक्ति हैं और उन्होंने शैक्षिक नीति में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह शिक्षा और समग्र शिक्षा में विविधता में विश्वास करते हैं। एआईसीटीई आत्मनिर्भर और जीवंत भारत के लिए योजनाओं और गुणवत्तापूर्ण पहलों की मेजबानी करता रहा है।”

धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान एआईसीटीई के सदस्य सचिव प्रोफेसर राजीव कुमार ने कहा कि, “मैं राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करने के लिए डॉ के कस्तूरीरंगन को धन्यवाद देता हूं। इस क्रांतिकारी यात्रा में, एआईसीटीई अपनी सभी योजनाओं और प्रयासों के माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अक्षरश: लागू करने के लिए प्रतिबंध है।

 

Pulkit Chaturvedi
Senior journalist with over 13 years of experience covering various fields of Journalism.

Keen interests in politics, sports, music and bollywood.

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