पेरिस। फ्रांस प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और लूटपाट के बाद राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों ने रविवार (18 अक्टूबर 2026) को राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि जिन्होंने लूटपाट की है, उन्हें नुकसान की भरपाई करनी होगी और जिन्होंने गणराज्य को गिराने की कोशिश की, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कम से कम 1,800 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
ये प्रदर्शन बढ़ती महंगाई और स्कूलों की खराब स्थिति के विरोध में देशभर में हुए थे। मैक्रों ने जनता के “गुस्से” और “शर्म” की बात कही।
कितने लोग उतरे सड़कों पर
अधिकारियों के अनुसार देशभर में करीब 5,50,000 लोगों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया, जबकि आयोजकों ने यह संख्या करीब 8,00,000 बताई। एक श्रमिक संगठन, छात्र संगठनों और 2018 के “येलो वेस्ट” आंदोलन को फिर जगाने की उम्मीद रखने वाले कार्यकर्ताओं के आह्वान पर लोग सड़कों पर उतरे।
रविवार को गिरफ्तारियों का आंकड़ा 2018 में येलो वेस्ट प्रदर्शनों के एक दिन में दर्ज लगभग 2,000 गिरफ्तारियों के करीब पहुंच गया। पेरिस पुलिस के अनुसार राजधानी क्षेत्र में 855 लोग गिरफ्तार हुए, जिनमें से 557 हिरासत में हैं।
हिंसा और नुकसान
शनिवार को नकाबपोश समूहों ने कई शहरों में आग लगाई और सिटी हॉल सहित सार्वजनिक इमारतों पर हमले किए। मध्य फ्रांस के लिमोज शहर में 19वीं सदी की सिटी हॉल इमारत में आग लगने से उसकी छत गिर गई और इमारत लगभग नष्ट हो गई।
गृह मंत्री लोरां नुनेज ने एक्स पर लिखा कि विरोध का अधिकार मौलिक अधिकार है, लेकिन जानबूझकर हिंसा से अव्यवस्था फैलाना उसका हिस्सा नहीं है। उन्होंने पेरिस, मार्सिले, लियों और बोर्दो जैसे शहरों में सैकड़ों दुकानों में लूटपाट का जिक्र किया। रविवार को पेरिस के प्लेस दे ला रेपुब्लिक पर फिर सैकड़ों लोग जुटे, जहां पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। पेरिस पुलिस के बयान के अनुसार एक व्यक्ति की दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई, जिसकी जांच पेरिस अभियोजक कार्यालय कर रहा है।
मैक्रों का आरोप और आगे के कदम
मैक्रों ने हिंसा के लिए “कट्टर वामपंथी समूहों के विद्रोही तत्वों” और उनके साथ जुड़े कई अपराधियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रीफेक्टों को निर्देश दिया है कि वे महापौरों के साथ मिलकर आने वाले हफ्तों में सार्वजनिक इमारतों और कारोबारों की सुरक्षा करें। जरूरत पड़ने पर प्रदर्शनों पर रोक भी लगाई जा सकती है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
अगले वसंत में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को देखते हुए नेताओं ने इस घटनाक्रम पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी। दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने सरकार को थकी हुई और दिशाहीन बताया। वामपंथी नेता जां-लुक मेलेंशों ने प्रधानमंत्री सेबास्तियां लकोर्नू पर “आग से खेलने” का आरोप लगाया, साथ ही कहा कि लूटपाट या तोड़फोड़ से उनके आंदोलन का कोई लेना-देना नहीं है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “फ्रांस जल रहा है” और इस अशांति को आप्रवासन से जोड़ा। रिपोर्ट के अनुसार फ्रांसीसी अधिकारियों और पुलिस ने हिंसा को आप्रवासियों से नहीं जोड़ा है। उनका कहना है कि इसके पीछे कट्टर वामपंथी समूह और लूटपाट के लिए शामिल हुए लोग हैं।
पेरिस के कुछ निवासियों ने तबाही पर हैरानी जताई। 26 वर्षीय मार्गो ऊद ने कहा कि वह आंदोलन का समर्थन करती हैं, लेकिन उन्हें नहीं लगा था कि मामला इतना बढ़ जाएगा। अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर हमारी अन्य खबर: पुतिन शिखर सम्मेलन: ट्रंप और शी के साथ बैठक का प्रस्ताव।
स्रोत: The Hindu। फोटो: Mathias Reding / Pexels