संभावना सामाजिक कल्याण समिति और ग्लोबल पीस फाउंडेशन का संयुक्त आयोजन

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वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा से परिवार में जीना उत्सव पूर्वक संभव

नोएडा : जीना उत्सव पूर्वक – वसुधैव कुटुंबकम-मानवीय परिवार संगोष्ठी का आयोजन संभावना सामाजिक कल्याणकारी समिति और ग्लोबल पीस फाउंडेशन इंडिया के संयुक्त तत्वावधान नोएडा मीडिया क्लब नोएडा उत्तर प्रदेश में आयोजित की गई जिसमें विद्वान वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए भारतीय संस्कृति के मानवीय पक्ष पर परिवार से लेकर विश्व परिवार तक वसुधैव कुटुंबकम मानवीय परिवार बनने की संभावनाओं पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत का मानवतावादी सनातन दृष्टिकोण ही एक वैश्विक परिवार के महान विचार को क्रियान्वित कर सकता है । जी 20, एनईपी 2020 और अनेक वैश्विक संगठनों में वसुधैव कुटुंबकम के विचार को प्राथमिकता से उठाया जा रहा है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे नवाब सिंह नागर जl पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने कहा कि भारतीय योग पद्धति और वसुदेव कुटुंबकम का विचार को इस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हो चुकी है। जिसके वैश्विक परिवार के महान विषयों की परिकल्पना को साकार करने में काफी सहायता मिली है। श्री नागर ने कहा कि भारत के बारे में यह सत्य है कि इसकी संस्कृति बहुत पवित्र और मानवीय रही है । उन्हीं पवित्र और मानवीय शिक्षा संस्कारों के आधार पर हम विश्व शांति स्थापित कर सकते है और विश्व को एक परिवार की संकल्पना देने में सफल हो सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ सुरेंद्र पाठक सलाहकार ग्लोबल पीस फाउंडेशन इंडिया द्वारा किया गया। अतिथियों का स्वागत और स्वागत वक्तव्य सुश्री आशा मोहिनी संभावना सामाजिक कल्याणकारी समिति द्वारा किया गया। सम्भावना की गतिविधियों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में परिवार टूट रहे हैं पूरी दुनिया में एकल अभिभावक संख्या मैं वृद्धि हो रही है भारत में अनाथ बच्चों की संख्या भी बहुत तेजी से बड़ी है। सुश्री मोहिनी ने कहा कि किस तरह से आज एकल परिवार मोबाइल परिवार में तब्दील हो रहे है। क्योकि एक घर में अगर चार सदस्य भी हैं सब आपस में बात करने के बजाये मोबाइल मे ही समय देते है। डॉ सी के भारद्वाज जो अध्यात्म और विज्ञान में समन्वय के विशेषज्ञ सावन आध्यात्मिक सत्संग सोसायटी नई दिल्ली ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भरत की विश्व संस्कृति को देश से बाहर के लोगों की द्वारा भी तेजी से शिकार किया जा रहा है जो कि एक उत्साह जनक पक्ष है। उन्होंने आध्यात्मिक योग की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए पारिवारिक जीवन में कैसे शक्ति प्राप्त की जा सकती है।

 

आचार्य प्रेम भाटिया संस्थापक अध्यक्ष भारतीय योग संस्थान दिल्ली, बहुत ही रोचक तरीके से परिवार में कैसे एकता सकती है और परिवार संघर्ष मुक्त हो सकते हैं इस पर अपने विचार व्यक्त किए उमरा श्री सर्वेश मित्तल राष्ट्रीय सलाहकार राष्ट्रीय सैनिक संस्था, द्वारा अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा गया कि बच्चों को बचपन में ही ऐसे पवित्र संस्कार दिए जाने चाहिए जो उन्हें एक अच्छा नागरिक बनाने में सहायता करें। उन्होंने कहा कि रोजगार परक शिक्षा प्रणाली को बदलकर संस्कार पर शिक्षा प्रणाली लागू करना समय की आवश्यकता है।
डॉ राकेश कुमार आर्य इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता ने इस अवसर पर कहा कि भारत ही वह देश है जिसने विश्व को एक परिवार की अवधारणा वेद के माध्यम से कृण्वंतो विश्वमार्यम् के माध्यम से दी। हमारे ऋषियों ने ही वसुधैव कुटुंबकम का विचार दुनिया में फैलाया। इसी विचार को लेकर यूएनओ जैसी संस्था का निर्माण हुआ, परंतु वह आधी अधूरी संस्था है। क्योंकि उसका चिंतन इतना व्यापक नहीं है जितना हमारे विषयों का चिंतन व्यापक होता था। उन्होंने कहा कि संसार को परिवार की सबसे उत्तम व्यवस्था भारत ने ही प्रदान की। इसी प्रकार सामाजिक व्यवस्था को एक परिवार के रूप में भी भारत ने ही स्पष्ट किया । अंत में वैश्विक परिवार की कल्पना कर भारत के ऋषियों ने अपने चिंतन के माध्यम से समस्त वसुधा को एक परिवार मानने का उत्तम विचार और चिंतन संसार को दिया । हमारे लिए अपेक्षित है कि हम ऋषियों के द्वारा दिखाए इस चिंतन को उस समस्त संसार के लिए प्रस्तुत करें।
वरिष्ठ पत्रकार अनिल चैनल के सीईओ रहे आचार्य राम गोपाल शुक्ला ने कहा कि भारत अपने सांस्कृतिक वैभव को घूम पराकाष्ठा पर पहुंचाकर ही विश्व गुरु बना था आज हमारे लिए अपेक्षित है कि हम उसी सांस्कृतिक वैभव की पुनः स्थापना करें। इस अवसर पर श्री अनिरुद्ध कुमार पॉलीमर एंड टैक्सटाइल साइंटिस्ट समाजसेवी ने बहुत ही व्यवहारिक उदाहरणों से बताया कि एक दूसरे के विचारों का सम्मान कर परिवार में एकता को स्थापित किया जा सकता है और अध्यात्म श्रीमती मोना मेहरा फाउंडेशन सर्च एक्सपर्ट हैप्पी होम नोएडा ने परिवार के महत्व को और परिवार को बनाने वाले लोगों को सम्मानित करने की आवश्यकता पर जोर दिया और उन्होंने कहा कि वह इसके लिए फैमिली मेकर सम्मान को स्थापित कर रही है। आलोक कुमार वरिष्ठ पत्रकार ने इस अवसर पर परिवार के टूटने पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्हें हिजड़ों की ओर वापस जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सुप्रसिद्ध समाजसेवी सत्य प्रकाश भारत में कहा कि परिवार को बचाए रखने के लिए व्यवस्था का परिवर्तनों की आवश्यकता है जिसके लिए सबको एकजुट होकर कार्य करना चाहिए। मास मूवमेंट अभियान के प्रमुख श्रीनिवास मैं जोर देकर यहां की व्यवस्थाओं पर पुनर्विचार करना चाहिए क्योंकि उसके दुष्परिणाम बहुत ही गंभीर रूप से सामने आ रहे हैं।
सुरेंद्र पाठक ने बताया कि उनका यह संगठन भारत के परिवार को विश्व परिवार में परिवर्तित करने के लिए कार्य कर रहा है। भारत की परिवार संस्कृति विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त करें और जिस प्रकार के मानवीय और पवित्र संस्कार और संबंध प्राचीन भारत में हुआ करते थे उन्हें हम फिर से स्थापित करने में सफल हो सके। उन्होंने कहा कि वह अब तक ऐसे 100 से अधिक कार्यक्रम आने वाले समय में आयोजित किए जाएंगेi उन्होंने आवाहन करते हुए यह भी कहा कि जिस प्रकार से सिंगल पेरेंट्स सोसाइटी और परिवार टूटने का क्रम इसके साथ में पारिवारिक लड़ाई झगड़े पढ़ रहे हैं उससे निपटने के लिए समाजसेवी संस्थाओं को आगे आकर इस मुद्दे पर समाज में संवाद को स्थापित करना चाहिए।

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