हरियाणा में गहराया सियासी संकट, 3 निर्दलीय विधायकों ने सैनी सरकार से वापस लिया समर्थन

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हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बड़ा झटका लगता हुआ दिखाई गे रहा है। तीन स्वतंत्र विधायक जो पहले भाजपा के पक्ष में थे, ने अब अपना समर्थन वापस ले लिया है और कांग्रेस को समर्थन दे दिया है। खबरों के मुताबिक, पूर्व सीएम भूपेन्द्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष उदय भान ने जानकारी दी है कि दादरी से विधायक सोमबीर सांगवान, नीलोखेड़ी से विधायक धर्मपाल गोंदर और पुंडरी से रणधीर गोलन ने कांग्रेस को समर्थन देने का ऐलान किया है।

हरियाणा में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस लेने वाले निर्दलीय विधायक रणधीर गोलन ने कहा, “पिछले 4.5 वर्षों से हमने भाजपा को समर्थन दिया है। आज बेरोजगारी और महंगाई अपने चरम पर है। इसे देखते हुए, हम हमने (सरकार से) अपना समर्थन वापस ले लिया है।” हरियाणा के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कहा कि लोगों को वर्तमान सरकार पर भरोसा नहीं है और यह देखते हुए कि इन लोगों ने अपना समर्थन वापस ले लिया है और कांग्रेस को समर्थन देने का फैसला किया है।

 

हुडा ने कहा कि उनका फैसला सही है, सही समय पर लिया गया सही फैसला है। ये जनता के हित में है…कांग्रेस की लहर है। मैं उनका स्वागत करता हूं। कुछ (निर्दलीय) विधायकों द्वारा हरियाणा सरकार से समर्थन वापस लेने और कांग्रेस को समर्थन देने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर, हरियाणा के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह जानकारी मुझे मिली है। हो सकता है कि कांग्रेस अब कुछ लोगों की इच्छा पूरी करने में लगी हो। कांग्रेस को जनता की इच्छाओं से कोई लेना-देना नहीं है।

तीन निर्दलीय विधायकों के हरियाणा सरकार से समर्थन वापस लेने पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि मुझे इसके बारे में पता चला, मैंने वह रिपोर्ट देखी लेकिन मेरे पास इसकी जानकारी नहीं है… जानकारी मिलने पर हमारे लोग आपको बयान देंगे। हमारी कोई भी सरकार खतरे में नहीं है…मुझे यह भी पता नहीं है कि यह खबर सच है या गलत। सांसद दीपेंद्र सिंह हुडडा ने कहा कि प्रदेश (हरियाणा) में हालात बीजेपी के खिलाफ हैं, प्रदेश में बदलाव तय है। बीजेपी सरकार बहुमत खो चुकी है। उन्होंने 48 विधायकों की जो सूची दी थी, उनमें से कुछ विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है क्योंकि वे लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं और कुछ निर्दलीय विधायकों ने भाजपा से अपना समर्थन वापस ले लिया है और कांग्रेस को अपना समर्थन दिया है। इसलिए अल्पसंख्यक विधायकों को कोई अधिकार नहीं है।

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