शिक्षण गुणवत्ता और फैकल्टी दक्षता को मिला नया आयाम
- भूमिका रावल
ग्रेटर नोएडा। नोएडा इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (NIIMS) में फैकल्टी की शिक्षण क्षमता को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से तीन दिवसीय बेसिक कोर्स इन मेडिकल एजुकेशन (BCME) कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित की गई। कार्यक्रम का संचालन NMC द्वारा नियुक्त समन्वयक डॉ. मुशर्रफ हुसैन, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, सर्जरी विभाग, हमदर्द इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड रिसर्च, नई दिल्ली के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। यह कार्यशाला नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के चेयरमैन डॉ. देवेश कुमार सिंह के नेतृत्व में आयोजित की गई। कार्यक्रम को डीन एवं पैथोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. (कर्नल) अरुण चौधरी का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ। कार्यशाला का समन्वय मेडिकल एजुकेशन यूनिट की कोऑर्डिनेटर एवं कम्युनिटी मेडिसिन की प्रोफेसर डॉ. मिथिला दयानिधि ने किया। इसमें NIIMS के 30 फैकल्टी सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता की।

कार्यशाला के प्रथम दिवस इंडियन मेडिकल ग्रेजुएट (IMG) की भूमिका, टीमवर्क और समूह व्यवहार पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। फैकल्टी सदस्यों को शिक्षण उद्देश्यों का निर्धारण, बड़े और छोटे समूहों में प्रभावी अध्यापन तकनीक तथा मूल्यांकन पद्धतियों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
द्वितीय दिवस एटीट्यूड, एथिक्स और कम्युनिकेशन (AETCOM) मॉड्यूल पर विशेष चर्चा हुई। साथ ही क्लिनिकल एवं प्रैक्टिकल टीचिंग की प्रभावी विधियां, दक्षताओं से शिक्षण विधियों का समन्वय, तथा प्रश्न पत्र निर्माण की तकनीकों जैसे LAQ, SAQ, ब्लूप्रिंटिंग और MCQ पर इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किए गए।
तृतीय दिवस दक्षताओं के अनुरूप लेसन प्लानिंग, क्लिनिकल स्किल्स का मूल्यांकन, अकादमिक लीडरशिप और मेंटरिंग पर विचार-विमर्श किया गया। इसके अतिरिक्त मास्टर टाइमटेबल, अकादमिक कैलेंडर और ईयर प्लानर जैसी शैक्षणिक योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यशाला के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागी फैकल्टी सदस्यों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। डीन एवं NMC-नियुक्त समन्वयक ने प्रमाण पत्र वितरित किए। कार्यक्रम के सफल आयोजन में योगदान के लिए NIIMS के निदेशक डॉ. एस. एन. गुप्ता एवं समस्त सहयोगी स्टाफ के प्रति आभार व्यक्त किया गया। यह कार्यशाला शिक्षण गुणवत्ता में सुधार और चिकित्सा शिक्षा के मानकों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।