- योगेश भट्ट
दुनिया भर में जारी बाल विवाह की गंभीर समस्या को लेकर भारत से एक महत्वपूर्ण आवाज उठी है। प्रख्यात बाल अधिकार कार्यकर्ता और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विधिवेत्ता भुवन ऋभु ने संयुक्त राष्ट्र से बाल विवाह के उन्मूलन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने की मांग की है।संयुक्त राष्ट्र के कमीशन ऑन द स्टैटस ऑफ वूमन (CSW) के 70वें सत्र के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत में बाल विवाह की दर में उल्लेखनीय कमी आई है, लेकिन इसके बावजूद विश्व स्तर पर स्थिति अभी भी चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि दुनिया में हर तीन सेकेंड में कहीं न कहीं एक बाल विवाह हो रहा है, जो बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा कि बाल विवाह को समाप्त करने के लिए वैश्विक स्तर पर जवाबदेही और कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूत करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा,भारत ने यह साबित किया है कि बाल विवाह का अंत संभव है। रोकथाम, संरक्षण, अभियोजन और बच्चों, समुदायों तथा धर्मगुरुओं की भागीदारी पर आधारित ‘संपूर्ण सरकार और संपूर्ण समाज’ के दृष्टिकोण के साथ हमारा देश 2030 तक बाल विवाह को समाप्त करने के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है।” उन्होंने बताया कि भारत में तीन वर्षों से भी कम समय में बाल विवाह की दर 23 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत से नीचे आ गई है। ऋभु ने कहा कि बाल विवाह दरअसल बच्चों के साथ होने वाले यौन शोषण और बलात्कार से कम नहीं है, जिसे अक्सर परंपरा और संस्कृति के नाम पर छिपा दिया जाता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से अपील करते हुए कहा कि “बाल विवाह उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस” घोषित किया जाना चाहिए, ताकि इस अपराध के खिलाफ वैश्विक प्रतिबद्धता और जवाबदेही को मजबूत किया जा सके तथा दुनिया भर की सरकारें और समाज इसे समाप्त करने के लिए संगठित हों।
इस कार्यक्रम में सिएरा लियोन की प्रथम महिला डॉ. फातिमा मादा बायो, नेपाल की महिला, बाल एवं वरिष्ठ नागरिक मंत्री शारदा श्रेष्ठ सहित कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने इस मांग का समर्थन किया।
उल्लेखनीय है कि वर्ल्ड लॉ कांग्रेस 2025 में वर्ल्ड जूरिस्ट एसोसिएशन द्वारा ‘मेडल ऑफ ऑनर’ से सम्मानित होने वाले पहले भारतीय अधिवक्ता भुवन ऋभु ने इस कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित किया। यह कार्यक्रम जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन और सिएरा लियोन की प्रथम महिला के कार्यालय के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र, विभिन्न देशों की सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के कई वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि कई देशों में बाल विवाह के खिलाफ कड़े कानून मौजूद हैं, लेकिन उनके कमजोर क्रियान्वयन के कारण यह प्रथा अब भी जारी है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन बाल अधिकारों के क्षेत्र में काम करने वाले नागरिक समाज संगठनों का देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है। इसके 250 से अधिक सहयोगी संगठन देश के 451 जिलों में 2030 तक भारत से बाल विवाह खत्म करने के लिए काम कर रहे हैं। इस नेटवर्क ने सरकारी एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से पिछले तीन वर्षों में लगभग 5 लाख बाल विवाह रुकवाने में सफलता हासिल की है।