नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में ‘एमपी’ज फॉर चिल्ड्रेन’ के बैनर तले 20 से अधिक सांसद 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बनाने के लक्ष्य के लिए एक साथ आए। इस पहल को ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ का समर्थन प्राप्त है, जो 250 से अधिक संगठनों का देशव्यापी नेटवर्क है। सांसदों ने बाल विवाह और बच्चों पर सोशल मीडिया के खतरों को गंभीर मुद्दा बताते हुए संसद में इसे उठाने, निजी विधेयक लाने और अपने क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। टीडीपी नेता लावू श्रीकृष्ण देवरायलु ने कहा कि बाल विवाह किसी एक दल का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मुद्दा है और सामूहिक प्रयास से इसे 2030 तक खत्म किया जा सकता है I
उन्होंने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम को सख्त बनाने, विशेष अधिकारियों व अदालतों की स्थापना और डिजिटल रिपोर्टिंग पोर्टल की जरूरत भी बताई। साथ ही, बच्चों के लिए उम्र आधारित सोशल मीडिया प्रतिबंध की मांग उठाई गई। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने ‘बाल विवाह मुक्त भारत दिवस’ घोषित करने की मांग करते हुए कहा कि बाल सुरक्षा राष्ट्रीय प्राथमिकता है।
देशभर में जागरूकता के लिए 28 राज्यों के 439 जिलों में 500 से अधिक ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ निकाले गए, जिनमें 100 से अधिक सांसदों समेत कई जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।