चंडीगढ़। “आसमान से आया फ़रिश्ता… प्यार का सबक़ सिखाने…” जैसे ही यह मधुर गीत गाते हुए डॉ. इंजीनियर राजेंद्र जैना ने खचाखच भरे खुले प्रांगण में प्रवेश किया, पूरा वातावरण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उपस्थित सभी लोगों ने खड़े होकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
डॉ. जैना की सुमधुर आवाज़ ने ऐसा जादू बिखेरा कि माहौल पूरी तरह संगीतमय और भावनाओं से सराबोर हो गया। एक के बाद एक 15 सदाबहार गीतों की प्रस्तुति ने वहां मौजूद लगभग 150 बुजुर्गों को झूमने, गुनगुनाने और नृत्य करने पर मजबूर कर दिया।

यह अवसर था चंडीगढ़ स्थित करतार आसरा ट्रस्ट में आयोजित “वृद्धजनों को समर्पित एक संगीतमय संध्या” का, जहां डॉ. राजेंद्र जैना ने अपने संगीत के माध्यम से बुजुर्गों के जीवन में खुशियों की नई रोशनी भर दी। इस विशेष कार्यक्रम में दिल्ली के कंझावला वृद्धाश्रम से भी वरिष्ठ नागरिकों का एक दल बस द्वारा पहुंचा, जिन्होंने स्थानीय बुजुर्गों के साथ इस भावनात्मक शाम का आनंद लिया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. जैना ने कहा कि बुजुर्गों को केवल भोजन और आश्रय ही नहीं, बल्कि समय, अपनापन और भावनात्मक सहारा सबसे अधिक आवश्यक है। उन्होंने बताया कि दिल्ली के कई वृद्धाश्रमों में सफल कार्यक्रमों के बाद अब उन्होंने देशभर के ओल्ड एज होम्स में जाकर बुजुर्गों के लिए ऐसे संगीतमय आयोजन करने का संकल्प लिया है।
इस अवसर पर उनकी आगामी फिल्मों “बेदखल” और “पिता या पैसा” का मुहूर्त भी किया गया, जिससे कार्यक्रम का उत्साह और बढ़ गया।
करतार आसरा ट्रस्ट की चेयरमैन सुश्री चरण कमल कौर ने इस पहल को मानवता और प्रेम से परिपूर्ण प्रेरणादायक प्रयास बताते हुए कहा कि यह शाम आश्रम के सभी बुजुर्गों के लिए बेहद यादगार बन गई। डॉ. जैना के गीतों ने सभी के दिलों को छू लिया।
यह संगीतमय संध्या संगीत, संवेदना और मानवता का ऐसा अद्भुत संगम बनी, जिसने उपस्थित हर व्यक्ति के दिल में खुशियों और उम्मीद की नई किरण जगा दी।