नई दिल्ली। पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में उद्यमी पल्लवी गुप्ता ने एक अभिनव पहल प्रस्तुत की है। “ए सस्टेनेबल स्टोरी – टर्निंग आवर पार्क वेस्ट इंटू ग्रीन गोल्ड” विषय पर प्रकाशित लेख में उन्होंने पार्कों से निकलने वाले जैविक कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

पल्लवी गुप्ता, जो “द सस्टेनेबल स्टोरी” की संस्थापक और टॉरस ब्रांड की निदेशक हैं, पिछले 25 वर्षों से डिजाइन, फैशन और कॉर्पोरेट जिम्मेदारी के क्षेत्र में सक्रिय हैं। एसआरसीसी और आईआईएम दिल्ली से शिक्षित पल्लवी ने फैशन डिजाइन और व्यवसाय प्रबंधन में अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा दिया है। उनके उत्पादों में बांस, कॉर्क, केन, रिसाइकल्ड मेटल और ग्लास जैसी सामग्रियों का उपयोग किया जाता है।

उन्होंने अपने लेख में बताया कि पार्कों की “क्लीन-स्वीप” व्यवस्था अनजाने में मिट्टी से आवश्यक पोषक तत्व छीन लेती है। सूखे पत्तों और टहनियों को जलाने या हटाने के बजाय उन्हें मल्च में बदलकर मिट्टी को पोषक बनाया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने “चॉप-एंड-ड्रॉप” मल्च पद्धति अपनाने की सलाह दी है, जिसमें पेड़ों की सूखी टहनियों को छोटे टुकड़ों में काटकर पेड़ों के आसपास बिछाया जाता है। इससे मिट्टी की नमी बनी रहती है, खरपतवार कम होते हैं और प्राकृतिक उर्वरता बढ़ती है।

पल्लवी गुप्ता ने कहा कि प्रकृति स्वयं मिट्टी को समृद्ध बनाने के सभी संसाधन प्रदान करती है, आवश्यकता केवल प्राकृतिक चक्र को जारी रखने की है। उन्होंने समुदायों से अपील की कि वे अपने पार्कों और हरित क्षेत्रों में इस प्रकार की सतत और पर्यावरण-अनुकूल पद्धतियों को अपनाएं।
गौरतलब है कि पल्लवी गुप्ता का कार्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है और उनके ग्राहकों में मैकिन्से एंड कंपनी, अर्न्स्ट एंड यंग, गूगल तथा सिस्ट्रा जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएं शामिल हैं।