दिल्ली स्थित आकाशवाणी भवन में लेखिका डॉ. दर्शनी प्रिय की चर्चित पुस्तक “प्रधानमंत्री मोदी के अनमोल रत्न : भारत के अद्वितीय पद्मश्री” पर एक गरिमामय एवं विचारोत्तेजक परिचर्चा आयोजित की गई। दीप प्रज्वलन के साथ आरंभ हुए इस कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा, भाषा और संस्कृति जगत से जुड़े अनेक विद्वानों ने भाग लेकर पुस्तक की विषयवस्तु और उसकी सामाजिक-सांस्कृतिक प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता एवं लेखिका डॉ. शोभा विजेंद्र, वरिष्ठ भाषाविद प्रो. विमलेश कांति वर्मा, जेएनयू के प्रो. स्वर्ण सिंह, वरिष्ठ भाषा अधिकारी राकेश यादव, प्रसिद्ध कवि नरेश शांडिल्य, चर्चित लेखक कमलेश कमल, हिंदी अकादमी के पूर्व उप सचिव ऋषि कुमार शर्मा, कलाविद डॉ. मालविका जोशी तथा वरिष्ठ कवित्री अलका सिन्हा सहित कई साहित्य मर्मज्ञ उपस्थित रहे। आकाशवाणी के उप सचिव जितेंद्र सिंह कटारा की उपस्थिति भी विशेष रही।

वक्ताओं ने पुस्तक को भारतीय संस्कृति, लोक प्रतिभाओं और पद्म सम्मान प्राप्त वास्तविक जननायकों का जीवंत दस्तावेज बताया। डॉ. शोभा विजेंद्र ने कहा कि यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगी। प्रो. विमलेश कांति वर्मा ने इसे लेखिका के गहन शोध और अथक परिश्रम का परिणाम बताया, जबकि कमलेश कमल ने कहा कि पद्म सम्मान अब “पीपुल्स पद्म” बन चुका है और यह पुस्तक उसी बदलाव की सशक्त अभिव्यक्ति है।
प्रो. स्वर्ण सिंह ने कहा कि 2014 के बाद पद्म पुरस्कारों के लोकतांत्रिक विस्तार ने देश के वास्तविक नायकों को पहचान दिलाई है और यह पुस्तक उसी परिवर्तन को रेखांकित करती है। राकेश यादव ने इसे राष्ट्रप्रेम और स्वदेशी भावना से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रयास बताया। कवि नरेश शांडिल्य ने पुस्तक की सहज साक्षात्कार शैली की सराहना की, वहीं अलका सिन्हा ने इसे भविष्य में एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ बताया।
करीब दो घंटे चली इस परिचर्चा में वक्ताओं के साथ श्रोताओं ने भी सक्रिय भागीदारी की। साहित्यकारों ने एक स्वर में कहा कि डॉ. दर्शनी प्रिय द्वारा किया गया यह कार्य समाज के अनदेखे नायकों को मुख्यधारा में लाने वाला महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रयास है और भविष्य में भी ऐसी पुस्तकों की आवश्यकता बनी रहेगी।