केंद्र में मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत विपक्षी नेताओं ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याओं और सामाजिक सौहार्द जैसे मुद्दों को लेकर तीखी आलोचना की है।
एक पोस्टर जारी कर विपक्ष ने मोदी सरकार के 12 वर्षों को “नाकामियों का दौर” बताते हुए 12 प्रमुख मुद्दों को सामने रखा है। इनमें बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक असमानता, किसानों की बदहाली, स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा का व्यवसायीकरण, नोटबंदी, जीएसटी, संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव, सांप्रदायिक तनाव, विदेश नीति और चुनावी वादों को शामिल किया गया है।
राहुल गांधी ने कहा, “देश का युवा रोजगार के लिए भटक रहा है, किसान अपनी उपज का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहा है और आम आदमी महंगाई की मार झेल रहा है। सरकार को अपनी प्राथमिकताएं बदलकर जनता के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।”
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया, “लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और संघीय ढांचे को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। देश को विभाजन की राजनीति नहीं, विकास और सामाजिक सद्भाव की जरूरत है।”
अखिलेश यादव ने कहा, “भाजपा सरकार ने युवाओं को रोजगार, किसानों को समृद्धि और आम जनता को राहत देने के जो वादे किए थे, वे धरातल पर दिखाई नहीं देते। जनता अब जवाब मांग रही है।”
वहीं भाजपा का कहना है कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने बुनियादी ढांचे, डिजिटल क्रांति, गरीब कल्याण योजनाओं, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। भाजपा नेताओं के अनुसार विपक्ष जनता को गुमराह करने के लिए निराधार आरोप लगा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार की उपलब्धियों और विपक्ष के आरोपों को लेकर आने वाले समय में राजनीतिक बहस और तेज होगी, जिसका असर आगामी चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।