
नई दिल्ली। गांधी युवा बिरादरी के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता रमेश चंद शर्मा ने कहा है कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों, जनभागीदारी और जन-जागरण को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि घोषित और अघोषित आपातकाल की परिस्थितियों में बड़ा अंतर होता है, लेकिन किसी भी स्थिति में जनता के अधिकारों, पारदर्शिता और जवाबदेही की रक्षा सर्वोपरि रहनी चाहिए।
शर्मा ने पर्यावरण एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन के संदर्भ में कहा कि उनका संदेश देश के जागरूक नागरिकों तक पहुंच चुका है। ऐसे में अब अनशन समाप्त कर जन-जागरण, जन-संपर्क और जन-संवाद के माध्यम से व्यापक जनचेतना अभियान चलाना अधिक प्रभावी कदम होगा।

उन्होंने कहा कि किसी भी असंवेदनशील एवं संवादहीन व्यवस्था से अपेक्षित परिणाम प्राप्त करना आसान नहीं होता। ऐसे समय में लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीकों से जनमत तैयार करना, लोगों को जागरूक करना तथा जनशक्ति को संगठित करना आवश्यक है।
रमेश चंद शर्मा ने कहा कि समाज और राष्ट्र के निर्माण के लिए केवल संघर्ष ही नहीं, बल्कि निरंतर सेवा, जागरूकता और सकारात्मक जनभागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने कहा, “देश के लिए मरने से अधिक, देश और समाज के लिए जीने वालों की आवश्यकता है। जनहित के मुद्दों पर सतत संघर्ष और जनजागरण ही स्थायी परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करता है।”
उन्होंने नागरिकों से लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने, सामाजिक सरोकारों से जुड़ने और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।