भागवत कथा : परम शांति के लिए भक्ति उच्च मार्ग है: ठाकुर कृष्णचन्द्र शास्त्रीललित मोहन बंसललास एंजल्स. कलियुग में परम शांति के लिए ईश भक्ति उच्च मार्ग है. इसमें देहाभिमान एक बड़ी बाधा है. इसके लिए मानव को देहाभिमान से बचना चाहिए और निरंतर भक्ति का रसपान करना चाहिए. हरि को प्राप्त करने के कई मार्ग है, जिसमें भक्ति हरिप्रदत्त मार्ग हैं।

पासाडेना हिन्दू मंदिर में पिछले सात दिन की कथा के अंत में देश के अग्रणी कथाकार ठाकुर कृष्णचन्द्र शास्त्री ने कहा कि मनुष्य कोई भी कर्म करें, हरि का ध्यान कर के करे। इस संदर्भ में उन्होंने बताया कि भीम-जरासंध युद्ध के समय पाण्डव पुत्र को अभिमान हो गया था कि महाप्रकर्मी जरासंध ने युद्ध के लिए श्रीकृष्ण और अर्जुन को छोड़ कर उसे ही क्यों चुना। जरासंध -भीम युद्ध में कई दिन बीत गए, अंतत: भीम श्रीकृष्ण के पास गए। इस पर श्रीकृष्ण ने भीम के ज़रिए सीख दी है कि वे अपना कार्य करते हुए हरि का ध्यान रखें। महाभारत के युद्ध में भी श्री कृष्ण ने अर्जुन को भी इसी तरह संदेश दिया था कि वह परिणाम की इच्छा किए बिना हरि को याद रखते हुए युद्ध करे ।
श्री शास्त्री ने कथा के छठे दिन रुक्मणी विवाह की चर्चा करते समय सीख दी थी कि घर में जिस तरह घर में पुत्र का होना जरूरी है, उसी तरह एक पुत्री का होना बड़े सौभाग्य की बात है। बेटी को लक्ष्मी का रूप माना गया है. इस से पूर्व उन्होंने गोकुल और वृब्दावन में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, मथुरा में कंस के वध और अपने मातापिता देवकी और वासुदेव को कंस की जेल से मुक्त करने और रास पंचाध्यायी आदि की चर्चाएँ की।
भागवत कथा के सातवें और अंतिम दिन शनिवार को पहली बार शनिवार को छुट्टी के दिन युवाओं को कथा में देखा जा सका. इस पर वंदना बजाज ने टिप्पणी की यहाँ के स्कूलों और कालेजों के बच्चों के सम्मुख भाषा की समस्या है, दूसरे इस कथा के लिए स्कूल कालेजों से छुट्टी नहीं ली जा सकती.
इस्कान भक्त श्रीनिवास पटवारी कहते है कि श्री मदभागवतएम ही कृष्ण है और कृष्ण ही भगवतम है. इसकी रचना करते हुए वेदव्यास इस कथन से संतुष्ट हैं, तो हम क्योंनहीं? ठाकुर जी ने महाभगवतम् को पंचमवेद बताया है. यह भक्ति का रसपान है. जो जीव श्री हरि, गोविंद, श्री रणछोड़,श्री मदनगोपाल की भक्ति में डूबा हुआ है, उसे बड़ी भक्ति और क्या हो सकती है?