सियोल। उत्तर कोरिया ने कहा है कि उसने पनडुब्बी से दागी जाने वाली क्रूज मिसाइलों का परीक्षण किया है। उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने गुरुवार को बताया कि सेना ने बुधवार को देश के पूर्वी जलक्षेत्र में ऐसी दो तरह की मिसाइलों का परीक्षण किया। यह परीक्षण ऐसे समय हुआ है, जब वाशिंगटन और सियोल के साथ प्योंगयांग की कूटनीति लंबे समय से ठप है।
‘रणनीतिक’ हथियार बताया
सरकारी मीडिया की रिपोर्ट में इन हथियारों को ‘रणनीतिक’ बताया गया, जिससे संकेत मिलता है कि इन्हें परमाणु हथियारों से लैस करने की मंशा हो सकती है। हालांकि रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि मिसाइलें वास्तविक पनडुब्बी से दागी गईं या पानी के नीचे बने किसी परीक्षण प्लेटफॉर्म से।
उत्तर कोरियाई मीडिया के अनुसार परीक्षण का उद्देश्य देश की पानी के भीतर लड़ने वाली प्रणालियों की तैयारी का आकलन करना था। इसके साथ ही नौसेना की रणनीतिक मिशन पूरा करने की क्षमता बढ़ाना और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता की विश्वसनीयता दिखाना भी इसका मकसद बताया गया। दक्षिण कोरिया की सेना ने इस परीक्षण पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की।
हथियार परीक्षणों का सिलसिला
यह परीक्षण हाल के हथियार प्रदर्शनों की कड़ी का हिस्सा है। उत्तर कोरिया ने 20 सितंबर और 3 अक्टूबर को विभिन्न हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणालियों का परीक्षण किया था। प्योंगयांग के अनुसार इनका मकसद दक्षिण कोरिया और जापान की मिसाइल रक्षा प्रणालियों को भेदने में सक्षम हथियारों का विकास करना है।
हाल के हफ्तों में उत्तर कोरिया ने लाइव-फायर अभ्यास भी किए हैं और एक नया युद्धपोत नौसेना में शामिल किया है। शासक किम जोंग उन अपने परमाणु कार्यक्रम का प्रदर्शन करते रहे हैं। उन्होंने अमेरिका और दक्षिण कोरिया की ओर से ठप पड़ी बातचीत फिर शुरू करने के प्रस्तावों को ठुकरा दिया है।
कूटनीति पर गतिरोध
रिपोर्ट के अनुसार किम जोंग उन ने हाल के वर्षों में दक्षिण कोरिया के साथ सभी तरह की कूटनीति और सहयोग रोक दिया है और उसे स्थायी शत्रु बताया है। वाशिंगटन के साथ व्यापक परमाणु वार्ता भी वर्षों से गतिरोध में है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीति फिर शुरू करने की अपील की है, लेकिन किम ने अब तक इसे स्वीकार नहीं किया है। दोनों नेताओं के बीच बातचीत 2019 में टूट गई थी। उत्तर कोरिया की सरकार का कहना है कि वाशिंगटन प्योंगयांग के प्रति अपनी ‘शत्रुतापूर्ण’ नीति छोड़े और बातचीत की शर्त के तौर पर परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग वापस ले।
क्षेत्र पर असर
रिपोर्ट के अनुसार उत्तर कोरिया के लगातार परीक्षण दक्षिण कोरिया और जापान की मिसाइल रक्षा व्यवस्था को चुनौती देने के इरादे से किए जा रहे हैं। कोरियाई प्रायद्वीप से जुड़ी पिछली खबरों में मोदी को साउथ कोरिया ने दिया सियोल शांति पुरस्कार रिपोर्ट भी पढ़ी जा सकती है।
स्रोत: द हिंदू। फोटो: Enes Erdemli / Pexels