उत्तर रेलवे दूरसंचार सहकारी आवास समिति लिमिटेड और टी-होम्स बिल्डर के बीच सिद्धार्थ विहार, गाजियाबाद स्थित फ्लैटों को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। फ्लैट खरीदारों ने बिल्डर और संबंधित आवास समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद, गाजियाबाद जिला प्रशासन, पुलिस तथा रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) के अधिकारियों से शिकायत की है। शिकायतकर्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर फ्लैट मालिकों को न्याय दिलाने की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, सिद्धार्थ विहार परियोजना के लिए जमीन खरीदे जाने के बाद फ्लैटों के निर्माण, पंजीकरण, कब्जा हस्तांतरण और रखरखाव को लेकर कई समस्याएं सामने आई हैं। खरीदारों का आरोप है कि परियोजना का काम पूरी तरह पूरा होने से पहले ही फ्लैटों की रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू कर दी गई तथा कई आवश्यक दस्तावेजों और सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर सवाल बने हुए हैं।
रेरा पंजीकरण और पूर्णता प्रमाणपत्र पर सवाल
शिकायतकर्ताओं ने रेरा पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी का हवाला देते हुए कहा है कि परियोजना के फेज-1 में केवल ए और ई टावर के पंजीकरण/अनुमोदन का उल्लेख दिखाई देता है, जबकि फेज-2 और फेज-3 तथा अन्य टावरों के पंजीकरण की स्थिति स्पष्ट नहीं होने का आरोप लगाया गया है। खरीदारों ने परियोजना के पूर्णता प्रमाणपत्र, अधिभोग प्रमाणपत्र और आवश्यक अनुमतियों की स्थिति की जांच कराने की मांग की है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि फ्लैटों का विधिवत कब्जा देने से पहले आवश्यक सुविधाओं और कानूनी औपचारिकताओं की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि भविष्य में खरीदारों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
मेंटेनेंस शुल्क व डीजी चार्ज पर पारदर्शिता की मांग
फ्लैट मालिकों ने रखरखाव शुल्क की वसूली और उसके उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत के अनुसार, कुछ फ्लैटों से लगभग 4,500 रुपये प्रतिमाह मेंटेनेंस शुल्क वसूल किए जाने का आरोप है। खरीदारों का कहना है कि शुल्क की दर तय करने का आधार, खर्च का पूरा ब्योरा और संबंधित निवासियों की सहमति स्पष्ट होनी चाहिए।
इसके अतिरिक्त, डीजी चार्ज को 20 रुपये से बढ़ाकर 25 रुपये प्रति यूनिट किए जाने की बात भी शिकायत में उठाई गई है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि डीजल की वास्तविक खपत, संचालन खर्च, मीटर रीडिंग, बिलिंग रिकॉर्ड और निवासियों से वसूली गई कुल राशि का लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए।
अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की अपील
फ्लैट खरीदारों ने संबंधित विभागों से मांग की है कि परियोजना के दस्तावेजों, रेरा पंजीकरण, निर्माण की स्थिति, कब्जा हस्तांतरण, मेंटेनेंस शुल्क और डीजी चार्ज की स्वतंत्र जांच कराई जाए। उन्होंने कहा है कि जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता प्रमाणित होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।