गुवाहाटी। असम और मेघालय के बीच सीमा विवाद के दशकों बाद, कुलसी नदी के किनारे बसे दोनों राज्यों के ग्रामीण अब एक साझा मुद्दे पर एकजुट हुए हैं। वे दोनों राज्य सरकारों की संयुक्त कुलसी जलविद्युत परियोजना का विरोध कर रहे हैं।
क्या है परियोजना
The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, असम और मेघालय सरकारों ने जून 2025 में कुलसी नदी पर 55 मेगावाट की जलविद्युत सह सिंचाई परियोजना बनाने की योजना की घोषणा की थी। कुलसी ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी है और लुप्तप्राय गंगा डॉल्फिन का प्राकृतिक आवास मानी जाती है।
बांध का प्रस्ताव द्रोण, श्री और डिलमा नदियों के संगम पर है, जो मिलकर कुलसी नदी बनाती हैं। प्रस्तावित स्थल असम-मेघालय सीमा पर गुवाहाटी से करीब 80 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।
उकियाम में बड़ी रैली
रिपोर्ट के अनुसार, 8 अक्टूबर को बोडो, गारो, खासी और राभा समुदायों के 2,000 से अधिक लोग उकियाम में एकत्र हुए और परियोजना के प्रति अपना विरोध दोहराया। उकियाम प्रस्तावित बांध स्थल के पास है और 1970 के दशक से लंबित छह विवादित सीमा क्षेत्रों में से दो, बोरदुआर और लांगपीह, से लगभग बराबर दूरी पर है।
रैली का आयोजन असम-मेघालय संयुक्त संरक्षण समिति (AMJPC) ने किया था। इस समिति का गठन 2025 में परियोजना के विरोध को संगठित करने के लिए हुआ था।
पारंपरिक प्रमुखों ने कहा- नहीं देंगे सहमति
रैली में नोंगख्लाव, नोंगम्यनसॉ और रामब्राई के तीन पारंपरिक प्रमुखों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि वे इस परियोजना के लिए सहमति नहीं देंगे। नोंगख्लाव के प्रमुख ने कहा कि मेघालय में जमीन से जुड़ी परियोजनाओं के लिए पारंपरिक प्रमुखों से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना जरूरी होता है।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक प्रमुख अपने क्षेत्रों के संरक्षक हैं और इस परियोजना के लिए ऐसी सहमति नहीं दी जाएगी। अन्य दो प्रमुखों ने भी यही रुख अपनाया।
46 गांवों पर असर का दावा
AMJPC के अध्यक्ष अल्बर्ट नोंगलांग ने कहा कि प्रस्तावित बांध से दोनों राज्यों के 46 गांव प्रभावित होंगे। उनके अनुसार, मौद्रिक मुआवजा आदिवासी समुदायों के विस्थापन के दीर्घकालिक परिणामों की भरपाई नहीं कर सकता।
नोंगलांग ने कहा कि 62 मीटर ऊंचे इस बांध का असम के कामरूप जिले और मेघालय के पश्चिम खासी हिल्स जिले पर गंभीर पारिस्थितिक और सामाजिक असर पड़ेगा। समिति के असम से जुड़े सदस्यों ने कहा कि कोई भी परियोजना आगे बढ़ाने से पहले स्थानीय समुदायों और पारंपरिक संस्थाओं से परामर्श जरूरी है।
सरकार का पक्ष
जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना 55 मेगावाट बिजली उत्पादन के साथ लगभग 26,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई में मदद करेगी और बाढ़ के असर को कम करेगी। ब्रह्मपुत्र बोर्ड की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में जून 2017 के मूल्य स्तर पर इसकी लागत ₹1,454.95 करोड़ आंकी गई थी।
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स्रोत: The Hindu। फोटो: Quang Nguyen Vinh / Pexels