नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख फतिह बिरोल ने कहा है कि अगले साल भी तेल बाजार के सामान्य स्थिति में लौटने की संभावना कम है। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने मंगलवार, 20 अक्टूबर को फाइनेंशियल टाइम्स के सम्मेलन में यह बात कही। वजह जारी पश्चिम एशिया युद्ध को बताया गया है।
बिरोल ने क्या कहा
बिरोल ने कहा, “मुझे व्यक्तिगत रूप से कोई भरोसेमंद रास्ता नहीं दिखता कि 2027 सामान्यीकरण का साल होगा।” उन्होंने इसका संबंध खाड़ी क्षेत्र में आपूर्ति की उन बाधाओं से जोड़ा, जो अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमलों के बाद पैदा हुईं। रिपोर्ट में इन हमलों का समय पिछले फरवरी बताया गया है।
कीमतों पर असर
रिपोर्ट के अनुसार युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से कम थी, जो अब 100 डॉलर से ऊपर पहुंच चुकी है। खाड़ी की रिफाइनरियों को हुए नुकसान से डीजल की कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर पर हैं।
भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए ऊर्जा की कीमतें महत्वपूर्ण होती हैं। इस विषय पर भारत के रुख को लेकर पश्चिम एशिया में तनाव पर भारत की चिंता की खबर भी पढ़ी जा सकती है।
रणनीतिक भंडार की रिहाई
इसके जवाब में IEA ने सदस्य देशों के रणनीतिक भंडार से 40 करोड़ बैरल तक तेल जारी कराया है। बिरोल के अनुसार जरूरत पड़ने पर और रिहाई की जा सकती है। उन्होंने कहा, “यह बड़ी मात्रा है, लेकिन यह हमारे पास मौजूद तेल का सिर्फ 20 प्रतिशत है, 80 प्रतिशत अब भी हमारी जेब में है।”
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में संकट और गहराने पर सरकारें अन्य विकल्पों पर विचार कर सकती हैं, और ऐसी स्थिति को वे खारिज नहीं कर सकते।
होर्मुज और बीमा लागत
रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों पर नियंत्रण करने की बात कही है। इससे परिवहन बीमा की लागत बढ़ी है, हालांकि बताया गया है कि हाल के हफ्तों में आवाजाही युद्ध से पहले के स्तर पर लौट आई है।
जलवायु पर चिंता
बिरोल ने कहा कि युद्ध के कारण जलवायु परिवर्तन के जोखिमों से ध्यान हटा है। उनके अनुसार वैज्ञानिक पुष्टि कर चुके हैं कि जीवाश्म ईंधन जलाना ग्लोबल वार्मिंग का स्पष्ट कारण है। उन्होंने कहा कि चरम मौसम की घटनाओं की संख्या और तीव्रता के बावजूद यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय नीति एजेंडे में नीचे खिसक रहा है।
स्रोत: The Hindu – International। फोटो: Ali Mucci / Pexels