बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने आरोप लगाया है कि राज्य में बड़ी तेल कंपनियों के पेट्रोल में एथेनॉल तय 20% सीमा से कहीं ज्यादा मिलाया जा रहा है। सरकार की लैब जांच में एक नमूने में एथेनॉल की मात्रा 31.2% तक दर्ज की गई। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रिजवान अरशद ने शुक्रवार, 6 नवंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये नतीजे जारी किए और केंद्र सरकार से जवाब मांगा।
63 नमूनों की जांच, चार में से तीन से ज्यादा सीमा के पार
अरशद के अनुसार सरकार ने बेंगलुरु, कोलार, चिक्कबल्लापुर, बेंगलुरु ग्रामीण, रामनगर, मंगलुरु और तुमकुरु समेत राज्य के अलग-अलग हिस्सों से 63 पेट्रोल नमूने इकट्ठा किए थे। जांच में IOCL, HPCL, BPCL, नायरा एनर्जी, शेल और MRPL के कई नमूनों में एथेनॉल 20% से ज्यादा पाया गया।
सबसे ज्यादा 31.2% एथेनॉल IOCL के एक नमूने में मिला। इसके बाद HPCL पावर के नमूने में 30.5% दर्ज हुआ। बाकी नमूनों में 27%, 26.5%, 26.1%, 25.5%, 24.2%, 22.6%, 22.4%, 20.8% और 20.6% एथेनॉल मिला। सबसे कम 13.5% था। मंत्री ने कहा कि करीब हर पांच में से चार नमूनों में मिलावट 20% से ऊपर थी।
तेल कंपनियों की लैब ने नहीं बताई मात्रा
अरशद ने बताया कि माइलेज घटने और बार-बार गाड़ी खराब होने की शिकायतों के बाद जांच शुरू की गई थी। नमूने पहले IOCL और BPCL की अपनी लैब में भेजे गए, लेकिन रिपोर्ट में एथेनॉल की मात्रा का जिक्र नहीं था, जबकि यह तय जांच मानकों में शामिल है।
उन्होंने कहा, “तेल कंपनियों की लैब को एक प्रश्नावली भेजी गई थी। एक सवाल उनके उत्पादों में एथेनॉल की मात्रा को लेकर था। किसी भी कंपनी ने 63 में से एक भी नमूने के लिए इसका जवाब नहीं दिया। इससे हमें शक हुआ और हमने नमूने निजी NABL-मान्यता प्राप्त लैब में भेजे।” उनके मुताबिक कर्नाटक ऐसी जांच कर नतीजे सार्वजनिक करने वाला पहला राज्य है।
गाड़ियां E20 से ज्यादा के लिए नहीं बनीं
मंत्री ने कहा कि देश की 35 करोड़ गाड़ियों में से करीब 99% को 20% से ज्यादा एथेनॉल वाले ईंधन के लिए नहीं बनाया गया है। अप्रैल 2023 के बाद बनी गाड़ियां भी सिर्फ E20 के लिए प्रमाणित हैं। उन्होंने पेट्रोल पंपों की डिस्पेंसिंग मशीनों पर भी सवाल उठाया और कहा कि कई मशीनें सिर्फ E15 तक के लिए प्रमाणित हैं।
अरशद ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र के दखल के बाद वाहन कंपनियां अपनी गाड़ियों की एथेनॉल अनुकूलता पर खुलकर बोलने से बच रही हैं। बीमा पॉलिसियों से ईंधन से होने वाले नुकसान के प्रावधान हटाए जाने पर भी उन्होंने सवाल किया।
उपभोक्ताओं पर 1.01 लाख करोड़ रुपये का बोझ
राज्य सरकार के अनुमान के मुताबिक माइलेज घटने और मरम्मत के कारण उपभोक्ताओं पर हर साल करीब 1.01 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है। इसमें 10% माइलेज घटने से 62,000 करोड़ रुपये और मरम्मत पर 39,000 करोड़ रुपये का नुकसान जोड़ा गया है।
नीति आयोग की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार E20 के लिए बनी गाड़ियों में माइलेज 1-2% घट सकता है, जबकि पुरानी कारों में 6-7% और पुराने दोपहिया वाहनों में 3-4% की गिरावट आ सकती है। एथेनॉल एक सफाई एजेंट की तरह काम करता है और पुराने इंजनों में जमा गंदगी को ढीला कर फ्यूल फिल्टर जाम कर सकता है।
गडकरी और पुरी से मांगा स्पष्टीकरण
अरशद ने कहा कि केंद्र सरकार एथेनॉल मिश्रण से विदेशी मुद्रा बचाने की बात करती है, लेकिन इसका कोई फायदा वाहन चालकों तक नहीं पहुंचा। उन्होंने IOCL, BPCL और HPCL के 2025-26 के संयुक्त मुनाफे 77,821 करोड़ रुपये का हवाला देते हुए पूछा कि ज्यादा मिलावट की कीमत उपभोक्ता क्यों चुकाएं।
मंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से पूछा कि 20% से ज्यादा एथेनॉल वाला पेट्रोल उपभोक्ताओं तक कैसे पहुंच रहा है। उन्होंने गडकरी के 2018 के उस बयान की भी याद दिलाई जिसमें E20 आने के बाद पेट्रोल 55 रुपये लीटर होने की बात कही गई थी।
कर्नाटक सरकार ने 20% से ज्यादा एथेनॉल वाला पेट्रोल बेचने वाली कंपनियों पर कार्रवाई, प्रभावित वाहन मालिकों के लिए मुआवजे की व्यवस्था, पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल प्रतिशत का अनिवार्य प्रदर्शन और उपभोक्ताओं को अलग-अलग ईंधन मिश्रण चुनने का विकल्प देने की मांग की है।
केंद्र का रुख
केंद्र सरकार E20 पेट्रोल का बचाव करती रही है और इसे कच्चे तेल के आयात, उत्सर्जन और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने वाला बताती है। अक्टूबर में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने E20 को लेकर चिंताओं को “गढ़ी हुई कहानी” बताया था और कहा था कि 20% ही सरकार का लक्ष्य है, इसे आगे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।
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स्रोत: न्यूज़लॉन्ड्री / द न्यूज़ मिनट। फोटो: Fahad Puthawala / Pexels