- सुनील नेगी

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज हो गया। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बनी रही I
विपक्ष ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष ओम बिरला निष्पक्षता की संवैधानिक परंपरा का पालन नहीं कर रहे और सत्तारूढ़ दल के पक्ष में निर्णय ले रहे हैं। विपक्षी नेताओं का कहना था कि कई मौकों पर विपक्षी सांसदों को सदन में बोलने और महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने से रोका गया।
चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी के संसदीय व्यवहार पर टिप्पणी की, जिस पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी सांसदों ने कड़ा विरोध जताया और सदन में हंगामा किया। हालांकि संख्या बल के कारण प्रस्ताव का परिणाम पहले से ही लगभग तय था। लोकसभा में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास लगभग 293 सांसदों का समर्थन है, जबकि विपक्षी गठबंधन के पास करीब 238 सांसद हैं। कांग्रेस सांसद तरुण गोगोई ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि स्पीकर विपक्ष के संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी कर रहे हैं और विवादित मामलों में निष्पक्ष निर्णय नहीं ले रहे।
वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि स्पीकर का चुनाव सभी दलों के समर्थन से हुआ था और उनके निर्णय का सम्मान किया जाना चाहिए। अंततः अविश्वास प्रस्ताव गिर गया, लेकिन विपक्ष ने इसे लोकसभा अध्यक्ष के कथित पक्षपातपूर्ण रवैये के खिलाफ अपनी आवाज उठाने का प्रयास बताया।