ज्यूडिशियल काउंसिल ने देश में बढ़ते भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अनियमितताओं और सत्ता के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था के बिना “विकसित भारत” का सपना पूरा नहीं हो सकता। परिषद ने भ्रष्टाचार को लोकतंत्र, संविधान और सामाजिक न्याय के लिए गंभीर खतरा बताया।
काउंसिल के चेयरमैन श्री राजीव अग्निहोत्री ने कहा कि जब भ्रष्टाचार व्यवस्था का हिस्सा बन जाता है, तब ईमानदारी कमजोर पड़ जाती है और जनता का लोकतंत्र से विश्वास टूटने लगता है। उन्होंने कहा कि गरीबों को अधिकारों के लिए रिश्वत देनी पड़े, युवाओं को रोजगार के लिए सिफारिश का सहारा लेना पड़े और किसानों को योजनाओं का लाभ पाने के लिए भटकना पड़े, तो विकास के दावे खोखले साबित होते हैं।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत का अर्थ केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि पारदर्शी शासन, जवाबदेह प्रशासन और सभी नागरिकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है। यदि भ्रष्टाचार जारी रहा तो विकास का लाभ सीमित वर्ग तक ही रह जाएगा।
ज्यूडिशियल काउंसिल ने सरकार से सभी विभागों में डिजिटल पारदर्शिता लागू करने, भर्ती प्रक्रियाओं को निष्पक्ष बनाने, सार्वजनिक धन के उपयोग का स्वतंत्र ऑडिट कराने और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई की मांग की। परिषद ने भ्रष्टाचार मामलों के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करने तथा व्हिसलब्लोअर्स को कानूनी सुरक्षा देने की भी मांग उठाई।
देश के युवाओं से अपील करते हुए श्री अग्निहोत्री ने कहा कि भारत का भविष्य नैतिक नेतृत्व और ईमानदारी से ही सुरक्षित होगा। उन्होंने युवाओं, मीडिया, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों से भ्रष्टाचार के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाने का आह्वान किया।