- प्रवीण आर्य
नई दिल्ली। भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर केन्द्रीय आर्य युवक परिषद् के तत्वावधान में ऑनलाइन विचार गोष्ठी आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि देश में समान आचार संहिता (Uniform Civil Code) लागू करना ही डॉ. मुखर्जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धारा 370 हटाने के बाद इस ऐतिहासिक कार्य को भी पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि आर्य समाज एक देश, एक कानून की अवधारणा का पुरजोर समर्थन करता है।
अनिल आर्य ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अखंड भारत के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर की परमिट व्यवस्था का विरोध करते हुए “एक देश में दो प्रधान, दो विधान और दो निशान नहीं चलेंगे” का उद्घोष किया तथा राष्ट्रीय एकता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि धारा 370 और 35ए की समाप्ति उनके सपनों को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने डॉ. मुखर्जी के शैक्षिक योगदान का उल्लेख करते हुए बताया कि वे मात्र 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे कम उम्र के कुलपति बने और पश्चिम बंगाल में हिंदुओं की सुरक्षा एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए।
उत्तर प्रदेश के प्रांतीय अध्यक्ष प्रवीण आर्य ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का राष्ट्रहित में दिया गया बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा। वे राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय एकता के सच्चे प्रहरी थे।
आचार्य महेंद्र भाई ने युवाओं से डॉ. मुखर्जी के आदर्शों और राष्ट्रसेवा के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में ओम सपरा ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों पर चलकर ही देश की राष्ट्रीय एकता और अखंडता को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकता है।