गुरुग्राम। ओडिसी नृत्य की प्रतिष्ठित संस्था ‘नृत्याभिनय नृत्य एवं कला स्कूल’ का प्रथम वार्षिकोत्सव रविवार सायंकाल डीएलएफ फेज-2 स्थित आर्य समाज ऑडिटोरियम में भव्य एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और कला के प्रति समर्पण का सुंदर संगम बनकर उभरा।
संस्था के वरिष्ठ सदस्य विजय अग्रवाल ने बताया कि प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना एवं प्रशिक्षिका गुरु माँ कविता मोहंती ने वर्ष 2005 में इस संस्था की स्थापना की थी। ‘राष्ट्रीय नृत्य शिरोमणि’, ‘नृत्य भूषण’ और ‘ब्रज कादंबरी’ जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत गुरु माँ कविता मोहंती के मार्गदर्शन में संस्था ने ओडिसी नृत्य शिक्षण के 20 गौरवपूर्ण वर्ष पूरे किए हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ निर्मल रथ की मधुर गणेश वंदना तथा विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। सुप्रसिद्ध भजन गायक मिहिर रे की भक्तिमय प्रस्तुतियों ने पूरे सभागार को आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर कर दिया।
समारोह में संस्था के 35 विद्यार्थियों ने ओडिसी नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त की। कार्यक्रम का आयोजन गुरु माँ कविता मोहंती के मार्गदर्शन तथा निर्देशक हिरण्य मोहंती के नेतृत्व में संपन्न हुआ। प्रख्यात गुरु गंगाधर दास की उपस्थिति और आशीर्वाद ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।

दर्शकों में उपस्थित डॉ. विष्णुप्रिया एवं डॉ. अशोक चौधरी की नृत्य प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही। समारोह में सरोज मोहंती, डॉ. कृष्णप्रिया साहू, प्रो. डॉ. बसंत साहू, श्रीमती शुभाश्री महापात्र (आईएएस) सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।
मंच संचालन कनिका मक्कड़ एवं नूपुर अग्रवाल ने प्रभावी ढंग से किया। मास्टर अंशुमान के तबला वादन और आईआईटी के छात्र शुभकांत साहू की बांसुरी प्रस्तुति ने कार्यक्रम की सांगीतिक गरिमा को नई ऊंचाइयां दीं। कार्यक्रम स्थल की व्यवस्थाओं में अरूप सामंता का विशेष सहयोग रहा।

समारोह का विशेष आकर्षण विद्यार्थियों के अभिभावकों द्वारा प्रस्तुत संबलपुरी लोकनृत्य रहा। सीमित समय में तैयार की गई इस प्रस्तुति ने उत्साह, समर्पण और आत्मविश्वास का शानदार उदाहरण पेश करते हुए दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसे संस्था के गुरुजनों, वर्तमान एवं पूर्व विद्यार्थियों तथा अभिभावकों ने मिलकर एक परिवार की भावना के साथ सफल बनाया। यह आयोजन केवल वार्षिकोत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और सामूहिक सहयोग का प्रेरणादायी उत्सव बन गया।
समारोह के अंत में सभी प्रतिभागियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन एवं सहभागिता के लिए स्मृति-चिह्न और प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ. कृष्णा साहू, रवि महापात्र, रितु पांड्या, सिद्धार्थ गुप्ता, नेहा अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहे।