देश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और छोटे व्यापारियों को व्यापार में आ रही दिक्कतों को लेकर ” फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल ” ( FAIVM ) का एक प्रतिनिधि मंडल फेडरेशन के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सरदार गुरचरण सिंह राजू , प्रदेश महामंत्री राजीव शर्मा के नेतृत्व में देश के केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य व सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री श्री बी. एल. वर्मा से मिला । इस मौके फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव सी ए आर के गौर व राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं कोषाध्यक्ष सी ए राजेश्वर पैन्यूली भी मौजूद रहे ।


प्रतिनिधिमंडल द्वारा छोटे व्यापारियों के समक्ष आए दिन आ रही समस्याओं के समाधान हेतू मंत्री जी को एक ज्ञापन भी दिया गया । इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष गुरचरण सिंह राजू ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और उपभोक्ता आयोगों के कामकाज के तहत उन्हें आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर कराया जाए । जिससे सभी व्यापारी बेफिक्र होकर व्यापार कर सके ।
इस मौके पर प्रदेश महामंत्री राजीव शर्मा ने मंत्री जी को बताया कि शाश्वत सत्य है कि MSME भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं । इससे जुड़े व्यापारी रोजगार सृजन, विनिर्माण, निर्यात तथा आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। जबकि उपभोक्ता मुकदमों से जुड़ी प्रक्रियात्मक और परिचालन संबंधी समस्याओं के कारण कई छोटे व्यापारियों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ रहा है।
व्यापारियों की मुख्य चिंताएँ इस प्रकार हैं:

- तुच्छ और परेशान करने वाली शिकायतें: बड़ी संख्या में ऐसी शिकायतें दर्ज की जाती हैं जिनमें कोई ठोस आधार नहीं होता, जिससे छोटे व्यवसायों को भारी कानूनी खर्च उठाना पड़ता है और मुकदमेबाजी में अपना कीमती समय लगाना पड़ता है।
- छोटे व्यापारियों पर वित्तीय बोझ: उपभोक्ता मामलों में अपना पक्ष रखने के लिए उपभोक्ता आयोगों के समक्ष बार-बार पेश होना, कानूनी सलाहकार नियुक्त करना और यात्रा तथा प्रशासनिक खर्च उठाना पड़ता है, जो अक्सर विवाद के मूल्य की तुलना में बहुत अधिक होते हैं।
- एकतरफा आदेश (Ex Parte Orders): कई मामलों में, नोटिस मिलने में देरी या पेश होने में वास्तविक असमर्थता के कारण एकतरफा आदेश पारित कर दिए जाते हैं, जिससे गंभीर वित्तीय और प्रतिष्ठा संबंधी नुकसान होता है।
- मध्यस्थता के सीमित अवसर: हालाँकि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत मध्यस्थता की व्यवस्था शुरू की गई है, लेकिन नियमित कार्यवाही शुरू होने से पहले इसका प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं किया जा रहा है।
5 एक साथ कई कार्यवाही: व्यापारियों को अक्सर एक ही मामले के लिए कंज्यूमर कमीशन और अन्य कानूनी संस्थाओं के सामने एक साथ कई कार्यवाहियों का सामना करना पड़ता है, जिससे कानूनी कार्यवाही का दोहराव होता है। - निपटारे में देरी: जल्द न्याय के मकसद के बावजूद, कई कंज्यूमर शिकायतें लंबे समय तक लंबित रहती हैं, जिससे कंज्यूमर और बिजनेस दोनों के लिए अनिश्चितता पैदा होती है।
- ऑनलाइन सेलर और मार्केटप्लेस से जुड़ी समस्याएं: ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए काम करने वाले छोटे सेलर को अक्सर लॉजिस्टिक्स, डिलीवरी में देरी या प्लेटफॉर्म से जुड़ी समस्याओं के कारण कंज्यूमर की शिकायतों का सामना करना पड़ता है, जिन पर उनका बहुत कम या कोई कंट्रोल नहीं होता है।