बैंकॉक। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत-चीन व्यापार में गैर-शुल्क बाधाएं सबसे बड़ी रुकावट हैं। The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को थाईलैंड के बैंकॉक में IMF-विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के इतर अटलांटिक काउंसिल के साथ बातचीत में उन्होंने यह बात कही। उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के जल्द पूरा होने की उम्मीद भी जताई।
चीन के साथ बढ़ता व्यापार असंतुलन
सीतारमण ने कहा कि चीन के साथ बढ़ता व्यापार असंतुलन और भारतीय उत्पादों के लिए बाजार पहुंच पर लगातार प्रतिबंध बड़ी चिंता के विषय बने हुए हैं। उनके अनुसार, भारत ने जेनेरिक दवाओं, बोवाइन मीट, सब्जियों और अन्य जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के लिए चीन में बाजार पहुंच की लगातार मांग की है। लेकिन वर्षों की बातचीत के बावजूद बहुत कम प्रगति हुई है।
वित्त मंत्री ने कहा कि चीन ने चर्चा और जांच के जरिए मुद्दे सुलझाने की गुंजाइश होने के बावजूद फाइटोसैनिटरी उपायों और अन्य गैर-शुल्क प्रतिबंधों का इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि भारत ने बड़े व्यापार असंतुलन को ठीक करने के लिए व्यापारिक साझेदारों पर दंडात्मक शुल्क लगाने का रास्ता नहीं अपनाया। समय लगने के बावजूद भारत ने बातचीत को प्राथमिकता दी है।
अमेरिका के साथ समझौते पर उम्मीद
सीतारमण ने कहा कि वैश्विक व्यापार और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के हित में भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जल्द से जल्द पूरा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वाणिज्य मंत्री ने भी हाल में समझौते पर जल्द हस्ताक्षर की उम्मीद जताई है और बातचीत जारी है।
रिपोर्ट के अनुसार, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार, 15 अक्टूबर को कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का पहला चरण अंतिम रूप ले चुका है। उनके अनुसार, अब उसकी कानूनी ड्राफ्टिंग चल रही है।
BRICS किसी के खिलाफ नहीं
BRICS पर सीतारमण ने कहा कि इस समूह को किसी देश या गुट के खिलाफ मंच के रूप में नहीं, बल्कि अपने लोगों के कल्याण के लिए साझेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, BRICS दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और सदस्य देशों के बीच सहयोग से व्यापार और आर्थिक अवसर बढ़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि नए सदस्यों के जुड़ने के बाद 11 से 12 देश सक्रिय रूप से एक-दूसरे से जुड़े हैं। वित्त मंत्री के अनुसार, इन देशों का वैश्विक व्यापार में सामूहिक हिस्सा करीब 45 प्रतिशत है।
भारत की आर्थिक वृद्धि पर
सीतारमण ने कहा कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत ने मजबूत वृद्धि बनाए रखी है। उनके अनुसार, पिछले चार-पांच वर्षों में, खासकर कोविड-19 महामारी के बाद, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था रहा है। उन्होंने इसका श्रेय समावेशी विकास, संसाधनों तक व्यापक पहुंच, युवाओं के कौशल विकास, राजकोषीय अनुशासन और उच्च सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को दिया।
वित्त मंत्री के अनुसार, बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक निवेश का गुणक प्रभाव लोगों को सीधे उतनी ही राशि देने की तुलना में ज्यादा रहा है, और इससे रोजगार भी पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार का कर्ज मोटे तौर पर बुनियादी ढांचे के खर्च से जुड़ा है और कर्ज से बनी परिसंपत्तियों का लाभ अर्थव्यवस्था को मिल रहा है।
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स्रोत: The Hindu। फोटो: Wolfgang Weiser / Pexels