मेरठ। उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की ओर से आयोजित मेरठ खादी महोत्सव शनिवार (18 अक्टूबर 2026) को शुरू हो गया। दस दिन चलने वाली इस प्रदर्शनी में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए पारंपरिक उत्पाद, हस्तशिल्प, वस्त्र और स्वदेशी सामान प्रदर्शित किए जा रहे हैं। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार इसका उद्घाटन राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी और अन्य जनप्रतिनिधियों ने किया।
उद्घाटन के बाद जनप्रतिनिधियों ने प्रदर्शनी का भ्रमण किया और अलग-अलग राज्यों से आए व्यापारियों को सम्मानित किया।
प्रदर्शनी में क्या-क्या है
रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शनी में खादी के कपड़े, बनारसी रेशमी साड़ियां, गर्म कपड़े, कश्मीरी शॉल, सूखे मेवे और क्रॉकरी जैसे कई पारंपरिक सामान रखे गए हैं। इसके अलावा स्टोल, हर्बल उत्पाद, घर की सजावट का सामान और क्षेत्र विशेष की पारंपरिक वस्तुएं भी उपलब्ध हैं।
बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिशिर सिंह के अनुसार आने वाले लोग मुरादाबाद के पीतल के उत्पाद, पश्चिम बंगाल की कांथा कढ़ाई, बनारस के रेशमी उत्पाद, पिलखुवा की चादरें और सहारनपुर की लकड़ी की हस्तकला देख सकते हैं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार की खादी संस्थाओं ने भी अपने हाथ से बुने उत्पादों के स्टॉल लगाए हैं।
त्योहारी मौसम पर जोर
सिंह ने कहा कि त्योहारों का मौसम चल रहा है, इसलिए यह प्रदर्शनी दुर्गा पूजा, दशहरा, धनतेरस और दीपावली जैसे आयोजनों के लिए कई तरह के सामान उपलब्ध कराती है। उनके अनुसार पारंपरिक परिधान, घर की सजावट, हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुएं, लकड़ी की कलाकृतियां और पीतल का सामान यहां मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे लोगों को स्थानीय स्तर पर बने अनोखे उत्पाद खरीदने और पारंपरिक कारीगरों व छोटे उद्यमियों की मदद करने का मौका मिलेगा।
गांधी मंडप और आयोजन का उद्देश्य
प्रदर्शनी के बीच में एक गांधी मंडप बनाया गया है। इसमें चरखा रखा गया है, जो महात्मा गांधी की विरासत और स्वतंत्रता आंदोलन में खादी के महत्व को दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में ऐसी खादी प्रदर्शनियां पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा देने, रोजगार के अवसर पैदा करने और ग्रामोद्योग से जुड़े उद्यमियों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए आयोजित की जाती हैं। बताया गया है कि इस पहल का मकसद खादी को देश की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना और “वोकल फॉर लोकल” की सोच के तहत आत्मनिर्भरता व स्थानीय कारीगरों को समर्थन देना है।
आयोजकों का कहना है कि प्रदर्शनी में हाथ से बुने खादी परिधान, हस्तशिल्प और क्षेत्रीय पारंपरिक वस्तुएं एक साथ देखने को मिलती हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा। उत्सव और संस्कृति से जुड़ी अन्य खबर के लिए देखें: MAGNETIC FIELDS IS INDIA’S GLORIOUS BOUTIQUE FESTIVAL।
स्रोत: The Hindu। फोटो: Ranjeet Chauhan / Pexels