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एशिया और ओशिनिया में क्रिप्टो नियमन की नई दिशा: लाइसेंसिंग, स्टेबलकॉइन और टोकनाइज़ेशन पर फोकस

rashtratimesnewspaper December 31, 2025 1 min read
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एशिया और ओशिनिया में क्रिप्टो को लेकर बहस अब बदल चुकी है। नीति-निर्माता अब यह सवाल नहीं कर रहे कि डिजिटल एसेट्स को वित्तीय प्रणाली का हिस्सा होना चाहिए या नहीं। अब चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि इन्हें प्रणाली के भीतर किस तरह से संचालित किया जाए। नियामक स्टेबलकॉइन, टोकनाइज़्ड एसेट्स और लाइसेंस प्राप्त ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के लिए स्पष्ट और निगरानी वाले रास्ते खोल रहे हैं, जबकि अधिक लीवरेज वाले उत्पादों, केवल ऑफशोर मॉडल पर आधारित कारोबार और कमजोर अनुपालन पर सख्ती बढ़ा रहे हैं। अलग-अलग देशों के कदम ऊपर से बिखरे हुए दिख सकते हैं, लेकिन वास्तविकता में यह एक परिचित रेगुलेटरी ढांचे के हिस्से हैं, जो अलग-अलग गति से आकार ले रहे हैं। लाइसेंसिंग, कस्टडी मानक, बाजार आचरण के नियम और टैक्स पारदर्शिता साझा आधार बनते जा रहे हैं। उत्तर एशिया में जून का महीना पूंजी बाजार जैसे नियमन की ओर एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। जापान के नियामक ने संकेत दिया कि क्रिप्टो को मुख्यधारा के वित्तीय उत्पाद की तरह देखा जाएगा। प्रस्तावों में स्पॉट क्रिप्टो ईटीएफ के लिए रास्ता खोलना और जटिल व दंडात्मक टैक्स ढांचे की जगह इक्विटी जैसे सरल ढांचे को अपनाना शामिल है। वहीं, दक्षिण कोरिया ने क्रिप्टो को सट्टा क्षेत्र के बजाय नियंत्रित विकास क्षेत्र के रूप में पुनः स्थापित करना शुरू किया। अधिकारियों ने 2025 के अंत तक स्पॉट क्रिप्टो ईटीएफ को मंजूरी देने का रोडमैप पेश किया और “बेसिक एक्ट” का मसौदा सामने रखा, जिसके तहत वॉन-आधारित स्टेबलकॉइन जारी करने वालों को स्पष्ट पूंजी आवश्यकताओं के साथ लाइसेंस दिया जाएगा। इसी दौरान, केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक संप्रभुता की रक्षा के लिए सतर्क और बैंक-नेतृत्व वाले मॉडल को प्राथमिकता देने की बात कही।
हांगकांग ने थोड़ा अलग लेकिन पूरक रास्ता चुना। ट्रेडिंग तक सीमित रहने के बजाय, उसने वेब3 इंफ्रास्ट्रक्चर को पारंपरिक वित्तीय बाजारों से जोड़ने की रूपरेखा पेश की। इसकी नीति में स्टेबलकॉइन लाइसेंसिंग, टोकनाइज़्ड बॉन्ड और ईटीएफ, तथा पेशेवर निवेशकों के लिए डेरिवेटिव्स को नियंत्रित तरीके से खोलना शामिल है। जुलाई तक चर्चा इरादों से आगे बढ़कर अमल तक पहुंच गई। हांगकांग ने अगस्त लॉन्च से पहले अपने स्टेबलकॉइन नियमों को अंतिम रूप दिया और टोकनाइज़्ड सरकारी बॉन्ड को एक नियमित फंडिंग चैनल के रूप में स्थापित किया, न कि केवल प्रयोग के तौर पर। दक्षिण कोरिया में बहस और तेज हुई। रिटेल सीबीडीसी को लेकर उत्साह कम हुआ, जबकि बैंक द्वारा जारी वॉन स्टेबलकॉइन राजनीतिक और आर्थिक रूप से अधिक व्यवहारिक विकल्प के रूप में उभरे। प्रमुख बैंकों ने रुचि दिखाई, वहीं नियामक यह तय करने में जुटे रहे कि जारी करने की प्रक्रिया कितनी खुली होनी चाहिए। सिंगापुर ने “सख्त लेकिन खुला” रुख अपनाने की अपनी छवि को और मजबूत किया। एक तय समयसीमा ने ऑफशोर ग्राहकों को सेवाएं देने वाली स्थानीय क्रिप्टो कंपनियों को दोबारा लाइसेंस लेने या बाजार से बाहर निकलने के लिए मजबूर किया। इसके साथ ही, भरोसेमंद खिलाड़ियों को लगातार मंजूरी मिलती रही। संदेश साफ था—नवाचार का स्वागत है, लेकिन मजबूत गवर्नेंस, पर्याप्त पूंजी और कड़े नियंत्रण के साथ। समानांतर रूप से, खाड़ी देशों के नियामकों ने स्टेबलकॉइन और टोकनाइज़्ड फंड्स के लिए दुनिया के सबसे स्पष्ट ढांचों में से कुछ पेश किए, जिससे संस्थानों को अनुपालक ऑन-चेन कैश मैनेजमेंट और टोकनाइज़्ड ट्रेजरी उत्पाद उपलब्ध हुए। अगस्त में खुदरा जोखिम जहां सबसे अधिक दिखा, वहां सुरक्षा मानक और कड़े किए गए। दक्षिण कोरिया ने नए क्रिप्टो लेंडिंग उत्पादों की शुरुआत पर रोक लगाई, जिससे संकेत मिला कि लीवरेज और यील्ड आधारित मॉडल्स को विस्तार से पहले सीमित किया जाएगा। जापान ने नीति से अमल की ओर बढ़ते हुए नियामित येन-आधारित स्टेबलकॉइन को मंजूरी दी, जबकि टैक्स और डिस्क्लोजर सुधारों को ऑनशोर गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए जारी रखा।

हांगकांग का स्टेबलकॉइन ढांचा औपचारिक रूप से लागू हुआ, जिसके तुरंत बाद निवेशकों के लिए चेतावनियां जारी की गईं और पहचान जांच व प्राइवेसी को लेकर उद्योग में बहस शुरू हुई। यह डिजिटल कैश के लिए बैंक-स्तरीय अनुपालन की शुरुआती झलक थी। दक्षिण-पूर्व एशिया में, सरकारों ने प्रयोग और प्रवर्तन को साथ लेकर चलने की रणनीति अपनाई। थाईलैंड ने पर्यटकों के लिए नियामित क्रिप्टो-टू-बाह्ट रूपांतरण का परीक्षण किया। फिलीपींस ने बिना पंजीकरण वाले ऑफशोर एक्सचेंजों को चेतावनी दी और उपयोगकर्ताओं को लाइसेंस प्राप्त प्लेटफॉर्म की ओर मोड़ने के लिए ऐप स्टोर स्तर पर कदम उठाने के संकेत दिए। वियतनाम ने बैंक-नेतृत्व वाले क्रिप्टो इंफ्रास्ट्रक्चर को उपभोक्ता संरक्षण के रूप में प्रस्तुत किया, न कि प्रतिबंध के तौर पर। ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, हालांकि उनकी गति अलग-अलग है। ऑस्ट्रेलिया ने सख्त प्रवर्तन को स्पष्ट सिस्टम डिजाइन के साथ जोड़ा। AUSTRAC ने अनुपालन अपेक्षाएं बढ़ाईं, जिसमें बाहरी आश्वासन और गवर्नेंस की गहन जांच शामिल है, जबकि ट्रेजरी ने नियमन का फोकस उन क्षेत्रों तक सीमित किया जहां उपयोगकर्ताओं को सबसे अधिक नुकसान होता है—प्लेटफॉर्म आचरण और कस्टडी। इसी के साथ, केंद्रीय बैंक के टोकनाइज़ेशन कार्य ने स्टेबलकॉइन, डिपॉजिट टोकन और होलसेल सेटलमेंट साधनों को सट्टा संपत्ति के बजाय नियामित वित्तीय इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में स्थापित किया। न्यूज़ीलैंड ने अपेक्षाकृत शांत तरीके से मानकों को कड़ा किया। उसने एएमएल नियमों के तहत ग्राहक जोखिम-रेटिंग की अपेक्षाओं को मजबूत किया और स्पष्ट किया कि अलग से क्रिप्टो रेगुलेशन न होने का मतलब नियमों का अभाव नहीं है। एफएमए के टोकनाइज़ेशन कार्य के जरिए वेब3 को बाजार की बुनियादी संरचना के रूप में देखा जा रहा है, जहां जोर कस्टडी, परिचालन मजबूती, खुलासा और अखंडता पर है, न कि प्रचार आधारित ट्रेडिंग पर। रूस और मध्य एशिया के कुछ हिस्से समानांतर सोच को दर्शाते हैं—जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, उसे औपचारिक दायरे में लाया जाए और जो अस्थिरता पैदा कर सकता है, उस पर नियंत्रण रखा जाए। मॉस्को द्वारा माइनिंग उपकरणों के पंजीकरण का फैसला एक बड़े ग्रे सेक्टर को टैक्स, ऊर्जा और एएमएल निगरानी के दायरे में लाने की पहल है। कजाखस्तान ने संप्रभु स्तर पर रणनीति के संकेत दिए हैं, जबकि किर्गिस्तान के माइनिंग और टोकन प्रयोग दिखाते हैं कि छोटे देश भूगोल और ऊर्जा अर्थशास्त्र का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं, साथ ही कड़ी निगरानी का वादा भी कर रहे हैं। भारत के हालिया कदम भी इसी वैश्विक पैटर्न में फिट बैठते हैं। ऑफशोर एक्सचेंजों को एएमएल अनुपालन न होने पर नोटिस जारी किए गए हैं और बिना पंजीकरण वाले प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच सीमित करने के प्रयास तेज हुए हैं। विदेशों से मिलने वाला सबक यह नहीं है कि भारत किसी एक मॉडल की नकल करे, बल्कि यह है कि सुधारों का क्रम महत्वपूर्ण है। पहले प्लेटफॉर्म, कस्टडी और स्टेबलकॉइन के लिए रेगुलेटरी दायरा तय किया जाए। इसके बाद अनुपालन और उपभोक्ता सुरक्षा को शुरुआती चरण में ही मजबूत किया जाए। अंत में, टोकनाइज़ेशन और डिजिटल भुगतान के लिए ऐसे नियामित रास्ते बनाए जाएं, जो अच्छे गवर्नेंस को प्रोत्साहित करें और ऑफशोर अपारदर्शिता की गुंजाइश को कम करें। पूरे क्षेत्र में संदेश अब स्पष्ट होता जा रहा है। क्रिप्टो अब हाशिए पर होने वाली बहस नहीं रह गया है। इसे दिशा दी जा रही है, इसे नियामित किया जा रहा है और धीरे-धीरे इसे वित्तीय प्रणाली के केंद्र में शामिल किया जा रहा है।

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