नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने गुरुवार को बताया कि फ्रांस में शामोंडा वायरस से इंसान के संक्रमित होने का पहला दर्ज मामला सामने आया है। अब तक यह वायरस केवल पशुओं में पाया गया था। लाइवमिंट की रिपोर्ट के अनुसार संक्रमित मरीज की अक्टूबर की शुरुआत में मौत हो गई।
WHO प्रमुख ने क्या कहा
WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने सोशल मीडिया पोस्ट में मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर थी, जिससे वह संक्रमण और गंभीर बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील था। उन्होंने मृतक के परिजनों के प्रति संवेदना भी जताई।
टेड्रोस के अनुसार मरीज उस इलाके में था जहां पशुओं में यह वायरस फैल रहा था और कुलिकोइड्स मिज नाम के छोटे कीट भी मौजूद थे। WHO फ्रांसीसी अधिकारियों के संपर्क में है, जो संक्रमण के स्रोत और फैलाव के संभावित रास्तों की जानकारी जुटा रहे हैं।
मरीज के बारे में जानकारी
फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से बताया गया कि व्यक्ति लियों के अस्पताल में किसी दूसरी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए भर्ती था। स्थानीय अखबार ले प्रोग्रे के मुताबिक वह 60 साल से ऊपर की उम्र का था और लियों क्षेत्र में रहता था।
फ्रांसीसी अधिकारियों को आशंका है कि संक्रमण पूर्वी फ्रांस में मिज के काटने से हुआ, जहां इस साल की शुरुआत में पशुओं में वायरस फैला था। उनका कहना है कि मरीज की मस्तिष्क संबंधी जटिलताएं बहुत संभव है कि शामोंडा से जुड़ी थीं, हालांकि संक्रमण और मौत की जांच जारी है।
क्या है शामोंडा वायरस
यह वायरस मुख्य रूप से मवेशियों, भेड़, बकरी, घोड़े और अल्पाका जैसे पशुओं में मिलता है। यह श्मालेनबर्ग वायरस के समूह का है, जो पशुओं में प्रजनन संबंधी विकार पैदा करता है। पशुओं के बीच इसके फैलने का कारण मिज के काटने को माना जाता है, पर WHO के अनुसार इसके संचरण को पूरी तरह समझने के लिए और अध्ययन जरूरी हैं।
पशुओं में बुखार, दस्त और दूध उत्पादन में कमी इसके लक्षण हैं। गंभीर मामलों में गर्भपात और भ्रूण में गंभीर विकृतियां हो सकती हैं। कुछ घोड़ों में तंत्रिका संबंधी विकार भी देखे गए हैं।
यूरोप में फैलाव
यह वायरस पहली बार 1965 में नाइजीरिया में मवेशियों में पाया गया था। इसके बाद अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्सों में भी मिला। यूरोप में इसकी पहचान जुलाई के अंत में हुई और 20 अक्टूबर तक एक दर्जन से ज्यादा देशों में मामले दर्ज हो चुके थे, जिनमें फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और आयरलैंड शामिल हैं। फ्रांस का कहना है कि वायरस वसंत से ही देश में फैल रहा था।
जोखिम और निगरानी
WHO का आकलन है कि मौजूदा जानकारी और मिलते-जुलते वायरसों के संचरण के आधार पर यह अलग-थलग मानव मामला है और फिलहाल व्यापक प्रसार की आशंका कम है। संयुक्त राष्ट्र के हवाले से कहा गया है कि फ्रांसीसी अधिकारियों को अब तक आम जनता के लिए कोई स्वास्थ्य जोखिम नहीं मिला है।
विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) के अनुसार शामोंडा के लिए फिलहाल कोई व्यावसायिक टीका उपलब्ध नहीं है। यह बीमारी WOAH या यूरोपीय संघ के पशु स्वास्थ्य कानून की सूची में नहीं है, इसलिए इसकी रिपोर्टिंग अनिवार्य नहीं है। ऐसे में उपलब्ध आंकड़े इसके फैलाव की पूरी तस्वीर नहीं दिखा सकते।
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स्रोत: Mint। फोटो: Faraz Ahmad / Pexels