नई दिल्ली/वाराणसी। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान स्तंभ, पद्मभूषण से सम्मानित स्वर्गीय पंडित राजन मिश्रा जी की स्मृति में “राजन मिश्रा की स्मृति में संगीतमय संध्या” शीर्षक से देश की सांगीतिक राजधानी कहे जाने वाले वाराणसी और राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में दो दिवसीय विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। ये आयोजन उनकी समृद्ध विरासत और बनारस घराने की गौरवशाली परंपरा को समर्पित हैं।
इस संबंध में जानकारी देते हुए उनके सुपुत्र पंडित ऋतेश मिश्रा ने बताया कि पहला कार्यक्रम 24 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के प्रतिष्ठित स्टीन ऑडिटोरियम, इंडिया हैबिटेट सेंटर, लोधी रोड में सायं 6:30 बजे से आयोजित होगा। इस “राजन मिश्रा की स्मृति में संगीतमय संध्या” में देश के ख्यातिप्राप्त कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। प्रमुख कलाकारों में पंडित भोला नाथ मिश्रा (वोकल), श्री अदनान खान (सितार), श्री जूहेब अहमद खान (तबला), पंडित भारत भूषण गोस्वामी (सारंगी), श्री जय शंकर मिश्रा (तबला) और श्री जाकिर धोलपुरी (हारमोनियम) शामिल हैं। कार्यक्रम का संचालन सुश्री राधिका मिश्रा करेंगी तथा संयोजन रितभवी प्रोडक्शन्स द्वारा किया गया है।
इसके उपरांत 25 अप्रैल 2026 को वाराणसी के सनबीम लहरतारा परिसर में सायं 6:30 बजे से दूसरी “राजन मिश्रा की स्मृति में संगीतमय संध्या” का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध गायिका श्रीमती दिव्या शर्मा और बनारस घराने के प्रख्यात गायक पं. अनुप मिश्रा अपनी प्रस्तुति देंगे, जबकि सितार वादन में पं. नरेंद्र मिश्रा श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे। तबला संगत में श्री श्रीकांत मिश्रा एवं पं. राजेश मिश्रा तथा हारमोनियम पर पं. पंकज मिश्रा अपनी कला का योगदान देंगे। कार्यक्रम का संचालन अमित मिश्रा करेंगे।
वाराणसी का यह आयोजन रसिपा (राजन-साजन मिश्रा इंस्टिट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स), सनबीम ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टिट्यूशंस एवं कला प्रकाश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।
पंडित ऋतेश मिश्रा ने संगीत प्रेमियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इन दोनों “राजन मिश्रा की स्मृति में संगीतमय संध्या” का हिस्सा बनें और महान गुरु पंडित राजन मिश्रा जी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करें।
यह दोनों आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक उत्सव होंगे, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की उस अमूल्य धरोहर को सहेजने का प्रयास भी हैं, जिसे पंडित राजन मिश्रा जी ने अपने जीवनभर साधना और समर्पण से विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया।